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UP Voter List 2026: चुनाव आयोग ने SIR की तारीखें संशोधित कर फाइनल रोल मार्च में किया तय

Satyakhabarindia

UP Voter List 2026:  चुनाव आयोग ने देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया में मतदाता सूचियों की पूरी तरह से समीक्षा की जाती है और इसमें नामों की पुष्टि, नए नाम जोड़ने और अवांछित नाम हटाने का काम किया जाता है। अब उत्तर प्रदेश में चल रहे SIR की तिथियों में चुनाव आयोग ने बड़ा बदलाव किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने बताया कि आयोग ने 1 जनवरी 2026 को आधार तिथि मानते हुए नई तिथियां घोषित की हैं।

ड्राफ्ट मतदाता सूची की नई तिथि

मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि संशोधित तिथियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का प्रारूपिक (ड्राफ्ट) प्रकाशन अब 6 जनवरी 2026 को किया जाएगा। इस दौरान नागरिकों के लिए अपने नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अवधि निर्धारित की गई है। इस अवधि में मतदाता आयोग के पास अपने सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है ताकि आगामी चुनावों में किसी प्रकार की अनियमितता न हो।

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दावे और आपत्तियों का निस्तारण

ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के साथ ही दावा और आपत्तियों का निस्तारण भी शुरू हो जाएगा। नवदीप रिणवा ने कहा कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण, मतदान सूची में संशोधन और फॉर्मों की समीक्षा का कार्य 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक चलेगा। इस दौरान निर्वाचन अधिकारियों द्वारा सभी दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी और आवश्यक सुधार सूची में किए जाएंगे। इसके अलावा मतदाताओं को भी समय दिया जाएगा कि वे अपनी स्थिति और पंजीकरण की सत्यता सुनिश्चित करें।

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अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

सभी दावों, आपत्तियों और संशोधनों के निस्तारण के बाद उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा। यह अंतिम सूची आगामी चुनावों में उपयोग की जाएगी और इसे सभी निर्वाचन क्षेत्रों में सार्वजनिक किया जाएगा। मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सुनिश्चित करना है कि राज्य की मतदाता सूची पूरी तरह से सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद हो, ताकि सभी योग्य नागरिक अपने मतदान का अधिकार सुरक्षित रूप से प्रयोग कर सकें। यह कदम उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र की मजबूत नींव रखने और चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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