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भारत आने से पहले ही विवादों में घिरी अमेरिकी फार-राइट एक्टिविस्ट लौरा लूमर

Satyakhabarindia

अमेरिका की दक्षिणपंथी यानी फार-राइट कार्यकर्ता लौरा लूमर के भारत दौरे को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर यह जानकारी दी कि वह जल्द भारत आने वाली हैं। उन्होंने अपने संदेश में लिखा “जल्द मिलते हैं इंडिया।” हालांकि उनके इस ऐलान के बाद ही विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। इसकी वजह उनकी पुरानी टिप्पणियां मानी जा रही हैं जिनमें उन्होंने भारत और भारतीयों के बारे में विवादित बयान दिए थे।

भारत विरोधी बयानों के कारण बढ़ा विरोध

लौरा लूमर के भारत दौरे का विरोध मुख्य रूप से उनके पुराने बयानों के कारण हो रहा है। उन्होंने पहले भारतीय प्रवासियों को “थर्ड-वर्ल्ड इनवेडर्स” यानी तीसरी दुनिया के घुसपैठिए कहा था। इसके अलावा उन्होंने बॉलीवुड का मजाक उड़ाया और भारत में साफ-सफाई को लेकर भी टिप्पणी की थी। हालांकि साल 2025 में उनके ये विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए गए थे। बावजूद इसके कई लोगों ने उन पोस्ट के स्क्रीनशॉट साझा किए और सवाल उठाया कि भारत में ऐसे व्यक्ति के दौरे का स्वागत कैसे किया जा सकता है।

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कौन हैं लौरा लूमर

लौरा लूमर का जन्म साल 1993 में अमेरिका के एरिजोना राज्य के टक्सन शहर में हुआ था। उन्होंने Orme School से अपनी शुरुआती पढ़ाई की और बाद में फ्लोरिडा की बैरी यूनिवर्सिटी से ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही वह अमेरिका के दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट समूह प्रोजेक्ट वेरिटास से जुड़ गई थीं जिसकी स्थापना जेम्स ओ’कीफ ने की थी। इस संगठन में रहते हुए उन्होंने कई अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन किए। बाद में साल 2017 में उन्होंने यह संगठन छोड़ दिया और कनाडा के राइट-विंग मीडिया प्लेटफॉर्म द रेबल मीडिया से जुड़ गईं।

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सोशल मीडिया विवाद और भारत दौरे पर बहस

लौरा लूमर का नाम पहले भी सोशल मीडिया विवादों में आ चुका है। साल 2018 में उन्हें X प्लेटफॉर्म से बैन कर दिया गया था। बाद में जब एलन मस्क ने यह प्लेटफॉर्म खरीदा तो उनका अकाउंट फिर से बहाल हो गया। अब उनके भारत दौरे की घोषणा के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। कई लोग उनके पुराने बयानों को लेकर नाराजगी जता रहे हैं जबकि कुछ लोग इसे विचारों की स्वतंत्रता के नजरिए से देख रहे हैं।

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