रामलीला मैदान में PM Modi विरोधी नारे, राजनीतिक सियासत में नया विवाद, BJP और कांग्रेस आमने-सामने

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है और इस बीच राजधानी दिल्ली में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने रामलीला मैदान में एक भव्य रैली का आयोजन किया, जिसमें PM Modi के खिलाफ विवादित नारे लगाए गए। इस घटना के बाद भाजपा ने कड़ा विरोध जताया और इसे कांग्रेस के वास्तविक इरादों का सबूत बताया। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल सत्ता से प्रधानमंत्री को हटाना है। सोशल मीडिया पर इन नारे लगाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और राजनीतिक माहौल में गरमागरमी बढ़ा रहे हैं।
भाजपा का तीखा रुख और प्रतिक्रिया
भाजपा के नेताओं ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए कहा, “अब उनका एजेंडा साफ हो गया है। यह केवल ‘सर’ का मामला नहीं है और न ही संविधान पर हमला है। ‘सर’ का उल्लेख करके क्या उनका मकसद पीएम मोदी को हटाना है? हाल ही में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को धमकी दी थी। कांग्रेस ने पीएम मोदी का अपमान 150 से ज्यादा बार किया है।” भाजपा का कहना है कि यह नारे प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अभद्रता का प्रतीक हैं और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रामलीला मैदान रैली में कांग्रेस का अभियान
रामलीला मैदान में आयोजित रैली में देशभर से लाखों लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर कांग्रेस ने कथित मत फर्जीवाड़े और ‘सर’ शब्द के विरोध में अभियान चलाया। पार्टी के शीर्ष नेता और कार्यकर्ता रैली में शामिल हुए, जिसमें देशभर से आए समर्थकों ने जोरदार नारे लगाए। कांग्रेस ने रैली को अपने आंदोलन का प्रतीक बताते हुए इसे लोकतंत्र के हित में बताया, लेकिन भाजपा इसे सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक कार्रवाई मान रही है।
भाजपा प्रवक्ता संभित पात्रा की टिप्पणी
भाजपा प्रवक्ता संभित पात्रा ने इस मामले पर कहा, “यह हमारे प्रिय नेता का अपमान है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैंने अभी तक यह नारा नहीं सुना है, लेकिन यदि इसे सच में लगाया गया है, तो यह दर्शाता है कि कांग्रेस अभी भी जनता की मंशा को नहीं समझ पाई है। हर बार जब उन्होंने पीएम मोदी और उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है, जनता ने उन्हें ठुकराया है।” उनके अनुसार, यह न केवल राजनीतिक विवाद है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सम्मान का मुद्दा भी है।