Bihar Elections 2025: चिराग पासवान ने RJD को निशाना बनाया, मुस्लिम CM और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकार पर उठाए मुद्दे

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की वोटिंग डेट करीब आने के साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। एनडीए और ग्रैंड अलायंस एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। इसी बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने ग्रैंड अलायंस को मुसलिम मुख्यमंत्री के मुद्दे पर निशाने पर लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह याद दिलाया कि पहले भी यह पार्टी मुस्लिम मुख्यमंत्री के लिए तैयार नहीं थी।
चिराग पासवान का सोशल मीडिया पोस्ट
चिराग पासवान ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा कि 2005 में उनके पिता और पार्टी नेता, स्व. रामविलास पासवान ने मुस्लिम मुख्यमंत्री के लिए अपनी पार्टी तक बलिदान कर दी थी, लेकिन तब भी RJD ने समर्थन नहीं दिया। चिराग ने आगे लिखा कि आज 2025 में भी ग्रैंड अलायंस मुस्लिम मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री देने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आप हमेशा वोट बैंक के कैदी रहेंगे तो सम्मान और भागीदारी कैसे मिलेगी।

सीट-शेयरिंग और अल्पसंख्यक समुदाय का मुद्दा
ग्रैंड अलायंस में सीट-शेयरिंग के बाद यह विवाद और बढ़ गया। मुख्यमंत्री पद लगभग 14% आबादी वाले समुदाय को देने का प्रस्ताव है, जबकि उप मुख्यमंत्री का प्रस्ताव निशाद समुदाय (लगभग 2.5% आबादी) को दिया गया है। हालांकि, अल्पसंख्यक समुदाय (लगभग 18% आबादी) के लिए कोई ठोस जवाब अभी तक ग्रैंड अलायंस की ओर से नहीं आया है। इसी को लेकर चिराग पासवान ने राजनीतिक मोर्चा खोलते हुए सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक तूफान और नई बहस
ग्रैंड अलायंस के भीतर चल रही आंतरिक हलचल फिलहाल शांत है, लेकिन चिराग पासवान के हमले ने राज्य में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। चुनाव के पहले चरण के मतदान से कुछ ही दिन बचे हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री पद और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा और जोर पकड़ रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ग्रैंड अलायंस चिराग के आरोपों का क्या जवाब देती है।
चिराग का राजनीतिक कदम और असर
चिराग पासवान का यह कदम राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ लाने वाला है। उनका आरोप और सवाल अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधित्व और सत्ता-संतुलन के मुद्दों को सार्वजनिक कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव में केवल सीटें बांटना ही नहीं बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व भी राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।