2020 Delhi Riots: दिल्ली दंगों की साजिश मामले में सलिम मलिक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सहारा लिया

Satyakhabarindia

2020 Delhi Riots: 2020 के दिल्ली दंगों के साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पांच आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद अब एक और आरोपी सलीम मलिक उर्फ मुन्ना ने जमानत के लिए नई याचिका दाखिल की है। सलीम मलिक ने दावा किया है कि उनके खिलाफ भी अन्य आरोपियों के समान आरोप लगाए गए हैं और इसलिए उन्हें भी न्याय का समान अवसर मिलना चाहिए। सलीम मलिक उन ग्यारह आरोपियों में से एक हैं जिन्हें कथित तौर पर सीएए/एनआरसी विरोधी बैठक के आयोजकों और वक्ताओं के रूप में नामित किया गया है। उनके खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत आरोप लगाए गए हैं। इस याचिका को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाप्पी के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

याचिका में क्या कहा गया है

याचिका में बताया गया है कि मलिक के खिलाफ जो मामला दर्ज है उसमें उन्हें एक स्थानीय कार्यकर्ता के रूप में चित्रित किया गया है जो चांद बाग विरोध स्थल पर हुई बैठकों से जुड़ा था। यह स्थिति उनके सह-आरोपी सलीम खान से मिलती-जुलती है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को जमानत दी थी। आरोपितों की सूची में मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, शाहनवाज, फ़ुरकान, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद यूनुस, अतर खान, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज़ और उनके भाई खालिद शामिल हैं। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश के आधार पर दायर की गई है जिसमें कहा गया कि जो आरोपियों को जमानत मिली है उनका व्यवहार मुख्यतः दूसरों द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार था।

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अगली सुनवाई 8 जनवरी को निर्धारित

सलीम मलिक की जमानत याचिका की सुनवाई 8 जनवरी को निर्धारित की गई है। मलिक पर आरोप है कि उन्होंने 24 फरवरी 2020 को भजनपुरा इलाके में एक कार शोरूम में आग लगाई थी। याचिका में तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में माना था कि जिन आरोपियों को जमानत मिली है उनका व्यवहार बाहरी निर्देशों से नियंत्रित था। मलिक की स्थिति भी इसी तरह की है और उनके खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि उन्होंने किसी बड़ी साजिश रची हो या उन्होंने ऐसा माहौल बनाया हो जिससे तनाव बढ़ा हो।

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याचिका के मुख्य तर्क

याचिका में आगे कहा गया है कि सलीम मलिक के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह दिखाए कि वह किसी बड़ी साजिश के मास्टरमाइंड थे या उन्होंने हिंसा को बढ़ावा दिया। उनके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वे भी केवल स्थानीय विरोध प्रदर्शन से जुड़ी बैठकों तक सीमित हैं। इसलिए, याचिका में न्यायालय से गुजारिश की गई है कि मलिक को भी उन आरोपियों के समान जमानत दी जाए जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही राहत प्रदान की है। याचिका का यह भी तर्क है कि न्याय में समानता का सिद्धांत लागू होना चाहिए और इसी आधार पर मलिक की जमानत याचिका को स्वीकार किया जाना चाहिए।

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