पंचकूला DRO को अंतरिम जमानत, ACB नहीं करेगी गिरफ्तारी
21 दिन में 5 गुना हो गई थी प्रॉपर्टी की कीमत, मामले में तहसीलदार हो चुके गिरफ्तार

सत्य खबर हरियाणा
DRO HSVP : हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एंटी करप्शन ब्यूरो अब उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। अदालत ने अंतरिम जमानत देते हुए उन्हें जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
6 फरवरी को गिरफ्तारी से बचने के लिए डीआरओ जोगिंद्र शर्मा ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इस पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रमजीत अरोड़ा की अदालत में 11 फरवरी को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील दीपांशु बंसल ने दलील दी कि एसीबी के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि इस केस में जोगिंद्र शर्मा की कोई भूमिका है।
वकील ने कहा कि पीसी एक्ट की धारा 7A की अनुमति भी एसीबी के पास नहीं है, डिस्क्लोजर रिपोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है और न ही रिश्वत की मांग, स्वीकृति या रिकवरी का कोई प्रमाण है। अदालत नहीं सुनवाई होने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था जिसे आज अदालत में जारी किया है।
एसीबी की ओर से सरकारी वकील ने जोगिंद्र शर्मा को मुख्य साजिशकर्ता बताया। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को अंतरिम जमानत दे दी और उन्हें जांच में शामिल होने के निर्देश दिए।
उधर, गिरफ्तार तहसीलदार विक्रम सिंगला के मामले में विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। एसडीएम चंद्रकांत कटारिया ने कमिश्नर अंबाला को पत्र लिखकर सार्वजनिक डीलिंग से जुड़े पदों पर छह माह से अधिक समय से जमे कर्मचारियों के तबादले की सिफारिश की है। कमिश्नर ने भी डीसी पंचकूला को पत्र लिखकर सरकार के आदेशानुसार कार्रवाई करने को कहा है। अब संबंधित कर्मचारियों के तबादले की तैयारी चल रही है। इसके अलावा, विभाग ने तहसीलदार विक्रम सिंगला से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी तलब किए हैं। रजिस्ट्री, गवाहों की सूची और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी। एक सप्ताह में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
क्या है मामला
गौरतलब है कि पंचकूला से एक रेवेन्यू अधिकारी के करीबी ने 17 एकड़ जमीन 1 करोड़ रुपये में खरीदी और फिर उसे तीन हफ्ते बाद 5.8 करोड़ रुपये में बेच दिया था और 21 दिन में 4.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। यह जमीन पर्ल्स ग्रुप की थी। अहम बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने पर्ल्स ग्रुप से जुड़ी प्रॉपर्टीज को बैचने पर स्टे लगाया हुआ है, लेकिन अफसरों की मिली भगत से यह फर्जीवाड़ा किया गया।