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AIMIM के स्थापना दिवस पर ओवैसी ने SIR के जरिए नागरिकता छीनने का आरोप लगाया

Satyakhabarindia

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार (14 फरवरी 2026) की रात हैदराबाद के दारुस्सलाम स्थित पार्टी मुख्यालय में विशाल जनसभा आयोजित की गई। इस सभा को संबोधित करते हुए सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और फिरकापरस्त ताकतों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी अब NPR और NRC की जगह SIR के माध्यम से नागरिकों की शहरियत छीनने की कोशिश कर रही है। बिहार और महाराष्ट्र से आए पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों की मौजूदगी में यह भाषण राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना गया।

पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि और सियासी चेतावनी

ओवैसी ने अपने भाषण की शुरुआत सेलफोन की लाइट जलाने की अपील और 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में शहीद हुए 40 सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने कहा कि देश में हक मांगने वालों को दुश्मन समझा जा रहा है। दलित, आदिवासी और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मुल्क की खूबसूरती इसके अलग-अलग धर्मों और इबादतगाहों में है और बुजुर्गों का सपना होना चाहिए कि मंदिर के घंटों की आवाज के साथ मस्जिदों से ‘हय्य अल-सलाह’ की आवाज भी सुनाई दे।

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AIMIM के स्थापना दिवस पर ओवैसी ने SIR के जरिए नागरिकता छीनने का आरोप लगाया

नागरिकता और SIR को लेकर नया दावा

भाषण का सबसे संवेदनशील हिस्सा नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों पर रहा। ओवैसी ने दावा किया कि बिहार के बाद तेलंगाना और महाराष्ट्र में भी SIR लागू होने वाला है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने ‘जेन्युइन’ नाम मुस्तैदी से दर्ज करवाएं। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग किसी की नागरिकता साबित करने का अधिकार नहीं रखता, लेकिन सरकार ECI के जरिए यह कोशिश कर सकती है। उनका यह बयान राजनीतिक रूप से नए विवाद और बहस का कारण बन सकता है।

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स्थापना दिवस में पार्टी की सियासी मजबूती का संदेश

हैदराबाद की मक्का मस्जिद और मौलवी अलाउद्दीन के ऐतिहासिक विद्रोह का जिक्र करते हुए ओवैसी ने AIMIM की विस्तार यात्रा का भी उल्लेख किया। महाराष्ट्र और बिहार में पार्टी की बढ़ती सक्रियता के बीच यह भाषण अल्पसंख्यकों और दलितों के बीच पार्टी की पैठ मजबूत करने की बड़ी राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है। 68वें स्थापना दिवस पर ओवैसी ने न केवल अपनी ताकत दिखाई, बल्कि नागरिकता के मुद्दे को SIR के माध्यम से नए कलेवर में पेश कर आने वाले दिनों के लिए राजनीतिक बहस को हवा दी।

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