
Haryana CM Nayab Saini के भरोसे भारतीय जनता पार्टी पंजाब में अपने 47 साल के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ने वाली है। वर्तमान में पंजाब की आबादी करीब 3 करोड़ 21 लाख है और इसमें करीब 31.3% आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग की है। यह आबादी करीब एक करोड़ से ज्यादा बैठती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सैनी समाज के लोगों का है जिनकी आबादी करीब 40 लाख मानी जाती है। सैनी समाज के लोग पंजाब में हिंदू और सिख दोनों संप्रदायों में मौजूद हैं। अगर वोट शेयर की बात करें तो सैनी समाज का पंजाब में करीब 27 लाख वोट होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
पंजाब विधानसभा के चुनाव में अब करीब सवा साल का समय बचा है और ऐसे में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पंजाब के दौरे शुरू हो गए हैं।
भाजपा का गठन 6 अप्रैल 1980 को किया गया था और भाजपा ने पंजाब में अपने पहले चुनाव में महज एक सीट जीती थी। एक सीट से शुरू होकर अगले ही चुनाव में 1985 में और 1992 में भाजपा ने यहां 6-6 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद भाजपा और अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ने लगे 1997 में भाजपा ने अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 18 सीटों पर जीत दर्ज की यहां पर भाजपा अकाली दल के साथ सरकार में शामिल हुई। 2002 में भाजपा फिर से तीन सीटों पर सिमट कर रह गई, लेकिन 2007 में एक बार फिर भाजपा ने अकाली दल के साथ मिलकर सरकार बनाई। 2012 में भी भाजपा और अकाली दल की गठबंधन की सरकार बनी। 2017 में कांग्रेस की सरकार बनी और बीजेपी एक बार फिर से तीन सीटों पर सिमट गई। 2022 में आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई और भाजपा केवल दो सीटों पर रह गई। फरवरी 2027 में पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं।
सवा साल बाद होने वाले पंजाब विधानसभा के चुनाव को लेकर भाजपा ने नायब सैनी को बड़ी जिम्मेवारी दे रखी है। सैनी समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय से आने वाले नायब सैनी पंजाब में भाजपा की नैया को पार लगाने का प्रयास करेंगे। बीजेपी पंजाब में अब तक अपने बलबूते कुछ बड़ा नहीं कर पाई है। अकाली दल के साथ गठबंधन में भी वह छोटे पार्टनर की भूमिका में होती थी। यह स्थिति लगभग वैसी ही है जैसी किसी समय हरियाणा में होती थी। 2014 के चुनाव से पहले हरियाणा में भाजपा अपने बलबूते दो-तीन सीटों के अलावा कभी जीत दर्ज नहीं कर पाई लेकिन इनेलो और हविपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी लेकिन मोदी लहर में 2014 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अपने बलबूते बहुमत हासिल किया था। भाजपा अब इसी प्रकार की लड़ाई पंजाब में लड़ने वाली है।
भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश
पंजाब में नायब सैनी के जरिये भाजपा केवल सैनी नहीं, बल्कि पूरे पिछड़ा वोट बैंक को साधने की रणनीति बना रही है। सैनी पंजाब में एक पब्लिक प्लेटफार्म पर यह कहकर भी भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश कर चुके हैं कि उनकी मां पंजाब की हैं। हरियाणा में किसानों की 24 फसलों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदने के अलावा महिलाओं के लिए शुरू की गई ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना के जरिये भी अब पंजाब में आप सरकार की घेराबंदी होगी।
पंजाब में ‘अर्ली ऑपरेशन’
पार्टी सूत्र बताते हैं कि सैनी को पंजाब में सक्रिय करने का फैसला अचानक नहीं था। हरियाणा से लगते पंजाब के मालवा-दोआबा बेल्ट में सैनी समुदाय अच्छी संख्या में है और भाजपा को यहां नये सामाजिक विस्तार की जरूरत है। भाजपा का आकलन यह है कि पंजाब में पारंपरिक अकाली, कांग्रेस व आप की तिकड़ी से हटकर एक नया सामाजिक समीकरण बनाया जा सकता है। इसके लिए एक ऐसे चेहरे की जरूरत है जो गैर-विवादित, ग्राउंडेड और सीमाई राज्यों की सियासत समझने वाला हो। सैनी इन तीनों कसौटियों पर खरे उतरते हैं। इसीलिए पिछले कुछ महीनों से वे भाजपा हाईकमान के ‘पंजाब मिशन’ में लो-प्रोफाइल लेकिन अत्यधिक रणनीतिक भूमिका निभा रहे हैं।