गवाही के बदले 70 लाख, फिर भी विरोध में गवाही मामले में तीनों आरोपी तीन दिन के रिमांड पर
तीन दिन में पुलिस गुजरात और बेंगलुरु तक जाकर करेगी जांच

सत्य खबर हरियाणा
Mahendra Chawla : 70 लाख रुपए लेने के बावजूद कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले पानीपत के महेंद्र चावला, उसके भाई और भतीजे को अदालत में 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। इस दौरान पुलिस महेंद्र चावला को गुजरात, सहारनपुर और चंडीगढ़ लेकर जाएगी। वहीं उसके भाई देवेंद्र चावला को बेंगलुरु में लेकर जाएगी, जबकि भतीजे को उत्तराखंड ले जाकर पैसे की वसूली करने का काम करेगी।

इन तीनों को पुलिस ने शनिवार रात को गिरफ्तार कर लिया था और कल अदालत में पेश किया था। अदालत में इन्हें एक दिन का रिमांड देते हुए पुलिस की लंबे रिमांड की मांग पर फैसला सुरक्षित रखा था। आज अदालत में अपने फैसले में इन तीनों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
पुलिस के अनुसार अब तक की जांच में चौंकाने वाले खुलासा हुआ है कि महेंद्र चावला के हिस्से में 40 लाख रुपए आए, जो गुरदासपुर, सहारनपुर, चंडीगढ़ और गुजरात में छिपे होने का शक है। साथ ही सनौली स्थित घर से कंप्यूटर बरामद करना है। देवेंद्र चावला के हिस्से के 15 लाख रुपए आए थे। यह पैसे बेंगलुरु में रहने वाली इसकी मौसी की लड़की के पास होने की सूचना है। रामप्रसाद (भतीजा) से पुलिस ने 1 लाख 15 हजार रुपए बरामद कर लिए हैं। शेष 13.85 लाख रुपए उसके उत्तराखंड निवासी दोस्त से बरामद किए जाने हैं।
शिकायतकर्ता की तरफ से कोर्ट में पेश हुए सीनियर एडवोकेट पुष्पेंद्र सिंह ने कोर्ट में दलील दी, कि आरोपियों ने ब्लैकमेलिंग के जरिए हड़पे गए 70 लाख रुपए न केवल पानीपत, बल्कि उत्तर प्रदेश (शामली), पंजाब, उत्तराखंड (देहरादून) और गुजरात तक पहुंचाए। पुलिस को इन सभी राज्यों में छापेमारी कर रकम बरामद करनी है। अदालत में यह भी दलील दी गई कि आरोपी महेंद्र चावला का पुराना इतिहास आरटीआई (RTI) लगाकर पब्लिक सर्वेंट और रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल करने का रहा है। इसी पैटर्न पर उसने सरपंच से गवाही बदलने के नाम पर 70 लाख रुपए हड़पे और फिर 80 लाख रुपए की और मांग की।
गिरफ्तारी वारंट के बाद 16 मार्च की रात महेंद्र मीडिएटर के घर पहुंचा। वहां उसने कहा कि सरपंच संजय त्यागी से पंचायत में एक प्रस्ताव पेश करवाया जाए, जिसमें दुकान गिराने का ऑर्डर दिया जाए। हालांकि यह सामने नहीं आया कि महेंद्र ये दुकानें क्यों गिरवाना चाहता था। भगत सिंह ने बताया कि अगले ही दिन पंचायत से ये प्रस्ताव पास हो गया, लेकिन इसके बाद महेंद्र ने 18 मार्च को 80 लाख रुपए और देने की डिमांड की। धमकी दी कि अगर ये पैसे नहीं मिले तो कोर्ट में वह झूठी गवाही देगा। उसने कहा कि सरपंच करोड़पति है, 80 लाख रुपए देना उसके लिए बड़ी बात नहीं है। भगत सिंह ने आगे बताया कि हमने महेंद्र 80 लाख रुपए देने से मना कर दिया। इसके बाद उसने 19 मार्च को कोर्ट में अपनी पुरानी गवाही बदलकर सबके खिलाफ बयान दे दिया।
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