Delhi News: 15 साल पुरानी परियोजना में अब भी देरी, दिल्ली फ्लाईओवर निर्माण में भ्रष्टाचार का शक

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर के फेज-3 निर्माण में हुई असामान्य देरी और बढ़ी हुई लागत को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गंभीर कदम उठाते हुए एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7A और 13 के तहत दर्ज की गई है। ACB की प्रारंभिक जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिसमें अज्ञात सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ एक निजी ठेकेदार को भी आरोपी बनाया गया है। इस मामले में आरोप हैं कि परियोजना में जानबूझकर देरी और खर्च बढ़ाया गया जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
LG के आदेश पर शुरू हुई जांच और FIR दर्ज
दिल्ली के राज्यपाल (LG) ने अक्टूबर 2025 में इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तुरंत इस परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने पाया कि बारापुला फ्लाईओवर के निर्माण में अनुचित और असामान्य देरी हो रही है, जिसके कारण परियोजना की लागत भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए LG ने आवश्यक निर्देश दिए कि पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

PWD को सभी दस्तावेज सौंपने के निर्देश
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर LG ने विशेष संज्ञान लिया। जुलाई 2025 में हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में भी इस मामले को उठाया गया था। EFC ने गैर-जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की सिफारिश की और कहा कि देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को इस परियोजना से जुड़े सभी रिकॉर्ड सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जांच पूरी पारदर्शिता से की जा सके।
बारापुला फ्लाईओवर परियोजना में देरी के कारण और लागत में वृद्धि
बारापुला फ्लाईओवर का यह फेज-3 लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबा चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो सराय काले खां क्षेत्र में फ्लाईओवर से जुड़ता है। इस प्रोजेक्ट को पहली बार साल 2011 में मंजूरी मिली थी और दिसंबर 2014 में इसके लिए 1260.63 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। अप्रैल 2015 में निर्माण का जिम्मा L&T कंपनी को दिया गया था, जिसके बाद इसे अक्टूबर 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य था। लेकिन भूमि अधिग्रहण की समस्याएं, पेड़ों की कटाई की अनुमति में देरी और विभागीय लापरवाही के कारण परियोजना पूरा होने में भारी देरी हुई। अब यह अनुमान है कि यह जून 2026 तक पूरा होगा। इस दौरान प्रोजेक्ट पर 1238.68 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि नई अनुमानित लागत 1330 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
बारापुला फ्लाईओवर के निर्माण में देरी और लागत वृद्धि ने न केवल सरकारी खजाने पर भारी बोझ डाला है, बल्कि जनता की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एफआईआर और जांच से यह उम्मीद जग रही है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और ऐसे मामलों में भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों द्वारा लगातार निगरानी के बावजूद इस परियोजना में हुई लापरवाही पर कड़ा शिकंजा कसा जाना जरूरी है ताकि जनता के हितों की रक्षा हो सके।