राष्ट्रीय
दुनिया में बढ़ती जंग की आशंका के बीच एयरफोर्स की ताकत बनी निर्णायक हथियार


दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव जैसे Ukraine Crisis और मध्य पूर्व के हालात ने वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। Stockholm International Peace Research Institute की रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में वैश्विक सैन्य खर्च 2.44 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.8 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ते खर्च का सीधा असर देशों की सैन्य रणनीतियों पर पड़ा है और वे अपनी हवाई ताकत को तेजी से मजबूत कर रहे हैं।
हवाई शक्ति किसी भी देश की सैन्य क्षमता का सबसे अहम स्तंभ मानी जाती है। 20वीं सदी से ही युद्धों में एयरफोर्स की भूमिका निर्णायक रही है और आज के समय में यह और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आधुनिक युद्धों में तेज प्रतिक्रिया, लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता और तकनीकी बढ़त एयरफोर्स को सबसे प्रभावी बनाती है। यही वजह है कि दुनिया के बड़े देश अपनी एयरफोर्स को लगातार आधुनिक बना रहे हैं और नई तकनीकों को शामिल कर रहे हैं।

United States इस समय दुनिया की सबसे ताकतवर एयरफोर्स रखता है, जिसके पास 13 हजार से ज्यादा सैन्य विमान हैं। इसकी ताकत इतनी अधिक है कि यह अकेले कई बड़े देशों की संयुक्त हवाई ताकत से भी आगे है। दूसरे स्थान पर Russia है, जबकि China तीसरे स्थान पर है और तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। भारत ने भी इस दौड़ में बड़ी छलांग लगाते हुए 2025 में चौथा स्थान हासिल किया है, जो उसकी बढ़ती सैन्य ताकत को दर्शाता है।
India के पास वर्तमान में 2,229 सैन्य विमान हैं और इसका ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स स्कोर 0.1184 है, जो मजबूत रक्षा क्षमता को दर्शाता है। बढ़ते रक्षा बजट, आधुनिक तकनीक और रणनीतिक निवेश के कारण भारत तेजी से वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय में वैश्विक तनाव और संघर्ष की संभावनाओं के चलते देशों के बीच एयरफोर्स की प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। ऐसे में हवाई ताकत किसी भी देश की सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त का सबसे बड़ा आधार बनी रहेगी।