Rajasthan News: राजस्थान में 3175 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण, इन जिलों से होकर गुजरेगा नया एक्सप्रेसवे

Rajasthan News: राजस्थान की धरती अब सिर्फ रेगिस्तान और महलों के लिए ही नहीं बल्कि तेज़ी से बदलते इन्फ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) के लिए भी जानी जाएगी। राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना को अंजाम देने की ठान ली है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे। अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होता क्या है?
दरअसल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे वो हाइवे होते हैं जिन्हें बिल्कुल नई जगह पर बनाया जाता है मतलब जहां पहले कोई सड़क नहीं होती। इनका डिजाइन इस तरह से किया जाता है कि ये सीधे रास्ते में बिना ज़्यादा मोड़-मरोड़ के बन सकें।
इसके लिए ज़्यादातर खाली ज़मीनों और कम आबादी वाले इलाकों को चुना जाता है जिससे लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition) यानी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
अब बात करें राजस्थान की तो यहां पर जो ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है वो ब्यावर से लेकर गोमती और फिर भरतपुर तक फैलेगा। इस पूरे हाइवे की लंबाई लगभग 342 किलोमीटर होगी। ये सड़क राजस्थान के अंदरूनी इलाकों को जोड़ते हुए विकास की नई धारा लेकर आएगी।
प्रोजेक्ट का 95% काम हो चुका है पूरा
राज्य सरकार और नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की टीम मिलकर इस प्रोजेक्ट को रफ्तार दे रही है। जानकारी के मुताबिक इस Beawar to Bharatpur Expressway प्रोजेक्ट का लगभग 95% काम पूरा हो चुका है। शेष बचे हिस्से पर काम तेज़ी से जारी है।
इसका सर्वे व डीपीआर (Detailed Project Report) जनवरी महीने में ही पास हो चुका है। इसके बाद से ही साइट पर काम शुरू हो गया है। इस बार सरकार का फोकस है “कम टाइम में ज़्यादा काम।” यानी जल्द से जल्द इस ग्रीनफील्ड हाइवे को पूरा करके जनता को समर्पित करना।
कम आबादी वाले इलाकों से गुजरेगा हाइवे
सरकार और NHAI की एक खास रणनीति रही है कि ये एक्सप्रेसवे उन इलाकों से गुजरे जहां जनसंख्या कम है। इससे न सिर्फ भूमि अधिग्रहण में कम झंझट होगा बल्कि निर्माण में भी तेजी आएगी।
इससे लागत भी कम होगी और टाइमलाइन भी मेंटेन रहेगी। कुल मिलाकर ये कह सकते हैं कि ये एक्सप्रेसवे प्रैक्टिकली और इकोनॉमिकली दोनों तरह से फायदे का सौदा साबित हो रहा है।
अब तक अगर किसी को ब्यावर से भरतपुर जाना हो तो उसे घंटों का लंबा सफर तय करना पड़ता था। लेकिन अब जब ये Greenfield Highway बनकर तैयार हो जाएगा तो इस रूट पर ट्रैवलिंग बेहद आसान हो जाएगी। लोग (Private Cars) (Trucks) और यहां तक कि (Electric Vehicles) से आरामदायक सफर कर पाएंगे।
ये एक्सप्रेसवे हाई-स्पीड ट्रैफिक के हिसाब से तैयार किया जा रहा है जिसमें अलग से सर्विस लेन टोल प्लाजा इमरजेंसी लेन और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाए जाएंगे।
टूरिज्म को मिलेगा ज़बरदस्त फायदा
राजस्थान सरकार इस प्रोजेक्ट को सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक इकोनॉमिक बूस्टर के रूप में देख रही है। इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से ब्यावर गोमती और भरतपुर जैसे इलाकों को जोड़ा जाएगा जिससे इन जगहों पर व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।
(Transport Companies) को नया रूट मिलेगा जिससे वे कम समय में ज्यादा डिलीवरी कर पाएंगे। इसके अलावा टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि भरतपुर और आसपास के इलाकों में बहुत सारे ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल हैं जो अब दिल्ली और जयपुर से जुड़कर और ज्यादा सुलभ हो जाएंगे।
रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे
इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ ट्रैफिक में सुधार होगा बल्कि हजारों लोगों को (Jobs) भी मिलेंगी। निर्माण के दौरान लेबर से लेकर इंजीनियर सर्वेयर और मैनेजमेंट टीम तक सबको काम मिलेगा। इसके अलावा सड़क बनने के बाद जो सर्विस स्टेशन होटल्स रेस्टोरेंट्स और पेट्रोल पंप खुलेंगे उनसे भी स्थानीय लोगों को फायदा होगा।
फ्यूचर के लिए रोडमैप
राज्य सरकार का कहना है कि वो राजस्थान को न सिर्फ ट्रांसपोर्ट हब बनाना चाहती है बल्कि हर जिले को सीधे एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क से जोड़ना चाहती है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री पहले ही इस बात को कह चुके हैं कि आने वाले सालों में राज्य में कई और Greenfield और Brownfield Projects की योजना है। ये सिर्फ सड़कें नहीं होंगी बल्कि राज्य के विकास की धार होंगी।