सैनिकों के लिए न्याय आसान बनाने की पहल. चीफ जस्टिस ने बताई बड़ी योजना

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने लद्दाख के लेह स्थित आर्मी बेस कैंप में जवानों से मुलाकात कर एक ऐतिहासिक पहल की। यह पहली बार हुआ है जब किसी चीफ जस्टिस ने इस तरह सीधे सैनिकों के बीच पहुंचकर संवाद किया। उन्होंने सैनिकों के त्याग और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि देश की न्यायपालिका हमेशा उनके अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने ‘जय हिंद’ और लद्दाखी शब्द ‘जुले’ से की, जो स्थानीय लोगों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह दौरा न सिर्फ प्रतीकात्मक रहा बल्कि न्याय और सुरक्षा के बीच संबंध को मजबूत करने का संदेश भी देता है।
‘देश के पहरेदार’ कहकर सैनिकों का बढ़ाया मनोबल
अपने संबोधन में चीफ जस्टिस ने सैनिकों को ‘देश के पहरेदार’ बताते हुए कहा कि उनकी वजह से ही देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने रेजांग ला युद्ध का उल्लेख करते हुए मेजर शैतान सिंह भाटी और 13 कुमाऊं रेजिमेंट के वीर सैनिकों के बलिदान को याद किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन 114 शहीदों में कई उनके अपने राज्य हरियाणा से थे। यह जिक्र न केवल सैनिकों के साहस को सम्मान देने के लिए था, बल्कि देशवासियों को भी उनके योगदान की याद दिलाने का एक प्रयास था।

सैनिकों को न्याय दिलाने के लिए ‘वीर परिवार सहायता योजना’
चीफ जस्टिस ने माना कि सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए अपने और अपने परिवार के लिए न्याय प्राप्त करना आसान नहीं होता। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39A हर नागरिक को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की बात करता है और इसमें सैनिक भी शामिल हैं। इसी उद्देश्य से ‘वीर परिवार सहायता योजना’ शुरू की गई, जो राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत संचालित होती है। इस योजना के जरिए सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता दी जाती है, जिससे वे बिना किसी परेशानी के अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें।
न्यायपालिका की नई पहल और लद्दाख में विकास का संदेश
अपने दौरे के दौरान चीफ जस्टिस ने लेह और कारगिल में नए जिला अदालत परिसरों का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख जैसे दूरदराज के क्षेत्र भी देश का अभिन्न हिस्सा हैं और यहां के लोगों तक न्याय पहुंचाना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि देशभर में सैकड़ों विधिक सेवा क्लीनिक और हजारों विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है, जो सैनिकों के परिवारों की संपत्ति विवाद, वैवाहिक मामलों और अन्य कानूनी समस्याओं में मदद करती है। यह पहल न केवल न्याय को सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश के रक्षकों के लिए हर संभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है।