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राज्यसभा कार्यकाल खत्म होते ही जॉर्ज कुरियन ने छोड़ा मंत्री पद, BJP की रणनीति पर उठे सवाल

Satyakhabarindia

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने और दोबारा नामांकन न मिलने के बाद उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया। इस घटनाक्रम को बीजेपी की बदलती राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति ने स्वीकार किया इस्तीफा

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज हो गया।

राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण संवैधानिक रूप से उनका मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं था।

बीजेपी के पुराने और भरोसेमंद चेहरा

65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन केरल के कोट्टायम से आते हैं और पेशे से वकील हैं। वह बीजेपी के शुरुआती दौर से पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं। पार्टी के भीतर संगठनात्मक जिम्मेदारियों से लेकर राष्ट्रीय स्तर की कई भूमिकाएं उन्होंने निभाई हैं।

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टीवी डिबेट्स में भी वह बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे हैं। विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरों के दौरान उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करने के कारण वह राज्य में काफी चर्चित रहे।

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2024 में मोदी कैबिनेट में मिली थी जगह

जॉर्ज कुरियन को 2024 में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। उस समय राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे बीजेपी की केरल और ईसाई समुदाय तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा बताया था।

कुरियन सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े रहे हैं, जो केरल के प्रमुख ईसाई समुदायों में से एक माना जाता है। उनकी नियुक्ति को दक्षिण भारत में बीजेपी के विस्तार प्रयासों के संदर्भ में देखा गया था।

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चुनावी राजनीति में भी आजमाया हाथ

जॉर्ज कुरियन ने 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में पुठुप्पल्ली सीट से चुनाव लड़ा था। उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी से हुआ था। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रिय मौजूदगी बनाए रखी।

इसके अलावा, वह पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ. राजगोपाल के साथ भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका निभा चुके हैं।

राज्यसभा टिकट नहीं मिलने से बढ़ी चर्चाएं

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे जॉर्ज कुरियन को इस बार पार्टी ने दोबारा मौका नहीं दिया। उनकी जगह बीजेपी ने तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि केरल में पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने और नई रणनीतिक प्राथमिकताओं के चलते नेतृत्व ने नए चेहरों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

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जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बीजेपी की भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा रहा है। लंबे समय तक संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुरियन का राजनीतिक अनुभव पार्टी के लिए अब भी मूल्यवान है। आने वाले समय में उनकी नई भूमिका क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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