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नेपाल पीएम बालेन शाह के बयान पर भारत का सख्त जवाब सामने आया

Satyakhabarindia

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर दिए गए बयान के बाद अब भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत और नेपाल के बीच सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा पहले ही निर्धारित किया जा चुका है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बचे हुए कुछ हिस्सों पर तकनीकी और प्राकृतिक कारणों से विवाद की स्थिति बनी हुई है, जिसे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाया जा रहा है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच चल रही चर्चा एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

विदेश मंत्रालय ने क्या स्पष्ट किया

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत-नेपाल सीमा का अधिकतर हिस्सा पहले ही तय हो चुका है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी भी समाधान बाकी है। मंत्रालय के अनुसार, गंडक नदी के प्रवाह में बदलाव के कारण कुछ सीमाई क्षेत्रों में अस्पष्टता पैदा हुई है। इसके अलावा नो मैन्स लैंड और सीमावर्ती इलाकों में अतिक्रमण के मामले भी सामने आए हैं, जिन पर दोनों देशों की संयुक्त टीमें काम कर रही हैं। भारत ने यह भी दोहराया कि इन सभी मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से ही किया जाएगा।

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नेपाल पीएम बालेन शाह के बयान पर भारत का सख्त जवाब सामने आया

बालेन शाह के बयान से बढ़ी चर्चा

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में दिए गए अपने बयान में दावा किया था कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने के बाद यह जानकारी मिली कि भारत और नेपाल दोनों ने एक दूसरे के क्षेत्रों पर कुछ जगहों पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे को ऐतिहासिक तथ्यों और विशेषज्ञों की मदद से सुलझाया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद नेपाल की राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। यह पहली बार था जब उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर खुलकर बात की।

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चीन और ब्रिटेन का जिक्र और बढ़ी संवेदनशीलता

बालेन शाह ने अपने बयान में यह भी कहा था कि नेपाल ने इस सीमा मुद्दे को चीन और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ भी उठाया है। इस टिप्पणी के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। भारत ने हालांकि अपने बयान में स्पष्ट किया है कि किसी भी द्विपक्षीय मुद्दे में किसी तीसरे देश की भूमिका स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारत और नेपाल के बीच सभी समस्याओं का समाधान आपसी बातचीत और स्थापित तंत्र के माध्यम से ही किया जाएगा।

रिश्तों को लेकर संतुलन की कोशिश जारी

भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, और दोनों देश सीमा मुद्दों को बातचीत के जरिए हल करने पर जोर देते आए हैं। मौजूदा बयानबाजी के बावजूद दोनों पक्षों ने यह संकेत दिया है कि वे संवाद की प्रक्रिया को जारी रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक बयानबाजी से दूर रखकर तकनीकी और कूटनीतिक स्तर पर हल करना ही दोनों देशों के हित में होगा।

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