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चिनाब के पानी से सुलझेगा हरियाणा और पंजाब के बीच चल रहा SYL विवाद

केंद्र सरकार चिनाब के पानी को ब्यास की तरफ मोड़ने में लगी, हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री सहमत

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

CM Nayab Saini : हरियाणा और पंजाब के बीच सतलुज-यमुना लिंक नहर को लेकर हमेशा राजनीति गर्म रही है। हरियाणा हो या पंजाब जब भी चुनाव आते हैं यह मुद्दा एक बार फिर सिर उठाने लगता है। हरियाणा जहां सतलुज यमुना लिंक नहर के पानी पर अपना हक जताता है, वहीं पंजाब का कहना है कि उसके पास सरप्लस पानी है ही नहीं ऐसे में वह अपने राज्य को प्यासा रखकर हरियाणा को पानी कैसे दे सकता है।

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पिछले कई दशक से यह नहर हरियाणा और पंजाब में वोट बैंक जुटाने का साधन बनती रही है लेकिन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अब कहा है कि चिनाब नदी के पानी को पंजाब की ओर मोड़ा जा सकता है, ताकि उसे आगे हरियाणा के साथ सांझा किया जा सके और सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद सुलझाया जा सके।

सिंधु प्रणाली की तीन पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब, 1961 की सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को आवंटित की गई थीं, जिसे भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित कर दिया था। इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी एसवाईएल विवाद सुलझाने के लिए चिनाब का पानी मोड़ने का सुझाव दे चुके हैं।

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हरियाणा के मुख्यमंत्री इस समय पंजाब में चुनाव की तैयारी में भाजपा की बागडोर संभाल रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा यह बयान देना निश्चित तौर पर सतलुज यमुना लिंक नहर के विवाद के स्थाई समाधान की ओर संकेत करता है। चिनाब का पानी पंजाब की ओर मोड़ना ज्यादा मुश्किल नहीं है। केंद्र सरकार पहले ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुकी है।

भारत ने सिंधु संधि को बहाल करने के बजाय चिनाब पर दो प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। इसमें पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश छिपा है। बड़ा प्रोजेक्ट लाहौल-स्पीति में 2,352 करोड़ रुपए का चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट है। इस प्रस्ताव में 8.7 किलोमीटर लंबी एक सुरंग बनाई जाएगी ताकि चिनाब बेसिन से अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी प्रणाली में मोड़ा जा सकेगा। यह सुरंग एक बड़े इंटर-बेसिन नदी-जोड़ो पहल का हिस्सा होगी। प्रोजेक्ट का मकसद चिनाब की एक सहायक नदी चंद्रा से पानी को हाइड्रोलिक संरचनाओं और सुरंगों के जरिए ब्यास बेसिन की ओर भेजना है। इससे चिनाब का पानी पंजाब की ओर लाया जा सकेगा।

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