भारत अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ी बातचीत, जयशंकर और रुबियो की अहम फोन चर्चा

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही अटकलों के बीच मंगलवार को एक अहम कूटनीतिक बातचीत हुई। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब बीते कई महीनों से दोनों देशों के रिश्तों में व्यापार को लेकर कुछ तनाव देखने को मिला है। फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार रक्षा और सुरक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
ट्रेड डील को लेकर बढ़ी हलचल
इस फोन कॉल से एक दिन पहले अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिए थे कि दोनों देश ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों पक्ष सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं और मंगलवार को अगली ट्रेड वार्ता होने वाली है। इसी बयान के बाद जयशंकर और रुबियो की बातचीत ने इन अटकलों को और मजबूत कर दिया है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में लंबित मुद्दों को सुलझाने और भविष्य की रणनीति पर सहमति बनाने की कोशिश की गई है। व्यापार के साथ साथ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी भी इस चर्चा का अहम हिस्सा रही।

जयशंकर ने बातचीत को बताया सकारात्मक
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मार्को रुबियो के साथ उनकी अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई है। जयशंकर के अनुसार इस चर्चा में व्यापार महत्वपूर्ण खनिज परमाणु सहयोग रक्षा और ऊर्जा जैसे विषयों पर बात हुई। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष इन मुद्दों पर और अन्य विषयों पर संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं। वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी सोशल मीडिया पर बताया कि रुबियो और जयशंकर के बीच बातचीत सकारात्मक रही और इसमें द्विपक्षीय व्यापार वार्ता महत्वपूर्ण खनिजों और अगले महीने संभावित बैठक के अगले कदमों पर चर्चा हुई।
क्यों अटका हुआ है भारत अमेरिका ट्रेड समझौता
हालांकि कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका है। अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने हाल ही में दावा किया था कि 2025 में यह समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात नहीं की और भारतीय पक्ष इस डील को लेकर सहज नहीं था। हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया था और साफ कहा था कि बातचीत प्रक्रिया में रही है और किसी एक कॉल से इसका कोई लेना देना नहीं है। अब जयशंकर और रुबियो की ताजा बातचीत से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में दोनों देश इस लंबे समय से अटके व्यापार समझौते पर कोई ठोस फैसला ले सकते हैं।