Haryana: हरियाणा में अपराधियों की अब खैर नहीं! गोली चली तो पुलिस अफसरों पर गिरेगी गाज

Haryana: हरियाणा पुलिस की तरफ से ऑपरेशन ट्रैकडाउन शुरू किया गया है। यह ऑपरेशन अगले 16 दिन (5 से 20 नवंबर) चक चलेगा। ऑपरेशन ट्रैकडाउन का मकसद साफ है कि गोलीबारी से जुड़े भगौड़ों की पहचान करके उन्हें जल्दी से जेल भेजना और आगे अपराध रोकना। आदेश में जिम्मेदारी, समय-सीमा और काम का तरीका साफ बताया गया है। इस ऑपरेशन का समन्वय आईजी क्राइम राकेश आर्य करेंगे। कोई भी नागरिक उनसे सीधे मोबाइल नंबर +91 90342 90495 पर सूचना दे सकता है। पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
हर थाना अपने क्षेत्र के ‘सबसे बदनाम 5 अपराधियों’ की पहचान करेगा और उन्हें गिरफ्तार या सरेंडर कराने की कार्रवाई करेगा। उसी तरह, हर जिला और जोन ‘टॉप 10’ अपराधियों की सूची तैयार करेगा। राज्य स्तर पर एसटीएफ ‘टॉप 20’ की सूची बनाएगी और उन पर व्यापक शिकंजा कसेगी जो एसएचओ या डीएसपी अपने इलाके में ऐसे अपराधियों पर नियंत्रण नहीं रख पाएंगे, उन्हें सीधे जिम्मेदार माना जाएगा।पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कहा है कि केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि रोकथाम और कानूनी कार्रवाई दोनों पर बराबर फोकस होगा।

आदेश के मुताबिक जिन अपराधियों की पहचान नहीं हुई है, उनकी पहचान करें। जिनकी पहचान हो गई है लेकिन वे फरार हैं, उन्हें पाताल से भी ढूंढ निकालें और गिरफ्तार करें। जो आरोपी जमानत पर बाहर हैं, उनकी हिस्ट्री शीट खोलें। अगर वे फिर से अपराध में सक्रिय हैं, तो उनकी जमानत रद्द कराने की कार्रवाई करें। जहां अपराध सुनियोजित तरीके से हो रहा है, वहां संगठित अपराध की सख्त धाराएं लगाएं। अपराध से कमाई गई संपत्ति को चिन्हित कर जब्त करें। जो लोग ऐसे अपराधियों को प्रश्रय, संरक्षण या फंडिंग दे रहे हैं, उन पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई करें।
फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए हरियाणा पुलिस अब सीमाएं नहीं देखेगी। पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर के साथ समन्वय कर संयुक्त चेकिंग और हिरासत ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज की जाएगी। डीजीपी ने कहा कि ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ का लहजा और तरीका दोनों स्पष्ट हैं, कम बोलो, ज्यादा करो। फोकस इस बार दिखावे पर नहीं, बल्कि नतीजों पर रहेगा। कितने गिरफ्तार हुए, कितनों की जमानत रद्द हुई, कहां संगठित अपराध की धाराएं लगीं, और कितनी संपत्तियां जब्त हुईं। हरियाणा पुलिस का संदेश साफ है कि अब कानून बोलेगा, और बदनामों का वक्त खत्म होने वाला है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि इन सूचीबद्ध अपराधियों को आगे अपराध करने से रोकना और पुराने अपराधों के लिए कानून के सामने जवाबदेह ठहराना जरूरी है। एसएचओ और डीएसपी अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे। अगर ये आगे भी अपराध करते हैं, तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। मतलब, केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि रोकथाम और मजबूत कानूनी कार्रवाई दोनों पर बराबर जोर है।