Gurugram से पलायन कर रहे प्रवासी! बांग्ला भाषी होना बन रहा अपराध, बांग्ला बोलने वालों में डर का माहौल

Gurugram में गृह मंत्रालय के आदेश पर पुलिस ने अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इस अभियान के तहत, संदिग्ध प्रवासियों की पहचान की जा रही है, उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है और हिरासत केंद्रों में भेजा जा रहा है। इस अभियान ने शहर में रहने वाले कई परिवारों में भय का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे कुछ लोग गुरुग्राम छोड़कर चले गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस पूछताछ की आड़ में उन्हें परेशान कर रही है और उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर रही है।
कमाल की स्थिति यह है कि इस अभियान से जितना हड़कंप बांग्लादेशियों में है उससे ज्यादा स्थानीय निवासियों में है। गुरुग्राम की बड़ी बड़ी हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले लोग परेशान हैं। नागरिक समितियों यानी आरडब्ल्यूए ने पुलिस से अनुरोध किया है कि वह इस अभियान को रोके। असल में जब से गुरुग्राम पुलिस ने बांग्लादेशियों की पहचान करके उनको निकालने का अभियान शुरू किया है, तब से गुरुग्राम की व्यवस्था बिगड़ी है। हाउसिंग सोसायटी और प्राइवेट बंगलों, घरों में काम करने वाली घरेलू नौकरानियों और अन्य काम करने वाले लोग लापता हो गए हैं या कम हो गए हैं। ऐसा नहीं है कि वे सारे लोग बांग्लादेशी हैं। लेकिन उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं है।

उनमें ऐसे लोग भी हैं, जो बांग्ला बोलते हैं, लेकिन बांग्लादेशी नहीं हैं। कहा जा रहा है कि पुलिस बांग्ला बोलने वालों को पकड़ ले रही है और उन्हें बांग्लादेशी बता कर निकालने का अभियान शुरू कर दे रही है। ध्यान रहे बांग्ला बोलने वाले लोग पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा से लेकर पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य के नागरिक हो सकते हैं। बिहार के भी हो सकते हैं क्योंकि बिहार में भी बड़ी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी बसे हैं, जो 1971 में भारत आए थे। ऐसे लोगों के पास अगर आधार या दूसरे दस्तावेज हैं तो भी पुलिस उन पर ध्यान नहीं दे रही है। पुलिस की चिंता में कामगारों ने काम पर आना बंद कर दिया है। इससे गुरुग्राम की तमाम हाउसिंग सोसायटी में परेशानी हो रही है।
गुरुग्राम के साउथ सिटी 2 इलाके में पश्चिम बंगाल के सैकड़ों परिवार रहते हैं। यहाँ लगभग 500 झुग्गियों में इतने परिवार बसे हुए थे। लेकिन पुलिस कार्रवाई शुरू होने के बाद 300 से 400 परिवार पलायन कर गए। बाकी परिवार भी अपना सामान समेटकर पश्चिम बंगाल लौटने की तैयारी कर रहे हैं। सड़कों पर ट्रक दिख रहे हैं, जो लोगों का सामान लेकर उनके गृह राज्य जा रहे हैं। यह दृश्य स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से लोग रोज़गार की तलाश में सालों से गुरुग्राम में रह रहे हैं। ज़्यादातर लोग मज़दूरी करके अपना गुज़ारा करते हैं। कई परिवारों का कहना है कि वे पिछले 20 सालों से यहाँ रह रहे हैं और इस शहर को अपना घर मानते हैं। लेकिन मौजूदा कार्रवाई ने उनके जीवन में अनिश्चितता ला दी है। कुछ का कहना है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज़ हैं, फिर भी वे डरे हुए हैं।
प्रवासी मज़दूरों का कहना है कि वे पिछले 20 सालों से गुरुग्राम में रह रहे हैं और उनके पास आधार और वोटर आईडी कार्ड दोनों हैं। इसके बावजूद, उनका आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस उन्हें परेशान करती रहती है। उन्होंने कहा, “पुलिसवाले कभी भी आकर हमें उठा लेते हैं। पूछताछ के बाद हमें फिर छोड़ देते हैं। कुछ लोगों के साथ मारपीट भी की गई है। यहाँ तक कि महिला पुलिसकर्मी भी ठीक से बात नहीं करतीं। पुलिस हमें बार-बार परेशान कर रही है, जिससे हमें अपने घर लौटने पर मजबूर होना पड़ रहा है।”
गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर अमित कुमार दहिया ने बताया कि गुरुग्राम में चार होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। जहाँ संदिग्धों को लाया जा रहा है। ये सेंटर बादशाहपुर कम्युनिटी सेंटर, सेक्टर-10 कम्युनिटी सेंटर, सेक्टर-40 कम्युनिटी सेंटर और मानेसर कम्युनिटी सेंटर में बनाए गए हैं। इन सेंटरों में संदिग्ध प्रवासियों के दस्तावेज़ों की जाँच की जा रही है और सत्यापन के बाद ही उन्हें छोड़ा जा रहा है। वहीं, गुरुग्राम पुलिस से इस बारे में जानने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।