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अधिकारियों पर भड़के कृषि मंत्री, बोले सरकार बजट दे रही है फिर खेत तक क्यों नहीं पहुंचता

कहा, सरकार की योजना को लोगों तक पहुंचाने के लिए एसी हाल में बैठकर नहीं खेत में जाना होगा

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Central Agriculture State Minister : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा है कि सरकार किसानों के लिए संसाधन और बजट उपलब्ध करा रही है, लेकिन क्या उसका लाभ वास्तव में खेतों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को समझने के लिए दफ्तरों और एसी हॉल से बाहर निकलकर अधिकारियों को गांवों और खेत तक जाना होगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री करनाल के काछवा गांव में आयोजित खेत बचाओ अभियान के मंच से उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने अधिकारियों की कार्यशैली पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। इस दौरान मिट्टी जांच रिपोर्ट में देरी को लेकर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि किसानों के हितों से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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कार्यक्रम के दौरान मंत्री रामनाथ ठाकुर ने सीएसएसआरआई के अधिकारियों से सीधे सवाल किए। उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा मिट्टी का नमूना जांच के लिए दिया गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि वह पूरी तैयारी और तथ्य जुटाकर आए हैं। किसानों के महत्वपूर्ण कार्यों में देरी प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है और ऐसी कार्यशैली में सुधार जरूरी है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, मिट्टी की बिगड़ती सेहत और किसानों तक योजनाओं की वास्तविक पहुंच जैसे कई अहम मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया।

मंत्री ने कहा कि हरियाणा और पंजाब में अधिक उत्पादन की दौड़ ने खेती को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। धान, गेहूं और दूध उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बदले मिट्टी की उर्वरता लगातार कमजोर हुई है। रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग ने भूमि और जल संसाधनों पर गंभीर असर डाला है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है।

सेमिनार में मौजूद कृषि अधिकारियों से मंत्री ने जिले के 113 गांवों में संचालित मिट्टी जांच केंद्रों और हाल के दिनों में हुई जांचों का ब्यौरा मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार किसानों के लिए संसाधन और बजट उपलब्ध करा रही है, लेकिन क्या उसका लाभ वास्तव में खेतों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को समझने के लिए दफ्तरों और एसी हॉल से बाहर निकलकर अधिकारियों को गांवों और खेत तक जाना होगा।

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कार्यक्रम के बाद मंत्री एक प्रगतिशील किसान के खेत पहुंचे, जहां उन्होंने खेती, पशुपालन और पोल्ट्री गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में रासायनिक खाद की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता मिट्टी की सेहत को बचाना है। इसी उद्देश्य से किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है ताकि खेती लाभकारी होने के साथ-साथ टिकाऊ भी बन सके।

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