जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 26 जाट युवाओं की जेल में पांच-पांच हजार रुपए की मदद की थी भाजपा विधायक ने
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान झज्जर जेल में जेलर थे वर्तमान भाजपा विधायक

सत्य खबर हरियाणा
BJP MLA Sunil Sangwan : हरियाणा भाजपा के विधायक सुनील सांगवान ने 2024 के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत के राज को खोलने का काम किया है। भाजपा विधायक ने स्वीकार किया कि उन्होंने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान झज्जर जेल में जेलर रहते हुए जाट आरक्षण आंदोलन में जेल में पहुंचे 26 युवाओं के खाते में पांच-पांच हजार रुपए डाले थे। इन 26 युवाओं ने चुनाव के समय उनके पक्ष में चट्टान की तरह खड़े होकर काम किया। बता दें कि सुनील सांगवान ने केवल 1957 वोटों से कांग्रेस की मनीषा सांगवान को मात दी थी।

हिसार में जाट सेवक संघ की ओर से संघ लोक सेवा आयोग के अभ्यर्थियों के सम्मान में आयोजित समारोह में दादरी से विधायक सतपाल सांगवान ने बताया कि जिस समय यह जाट आरक्षण आंदोलन चल रहा था उसे समय वह झज्जर जेल में जेलर के रूप में तैनात थे। रात के समय जाट समाज के 26 युवाओं को जेल में लाया गया। उसे समय जेल में खाना बंद हो चुका था और कैंटीन से सामान खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। बाहर कर्फ्यू लगा हुआ था रोड बंद थे। अब उन्होंने सोचा कि उनके घर वाले मिलने के लिए कैसे आएंगे? ऐसे में उन्होंने हर युवक के खाते में पांच-पांच हजार रुपए डलवाए थे। उन्होंने कहा कि अगले दिन दलाल खाप के लोग युवाओं से मिलने के लिए आए तो उन्होंने शर्त रखी कि अगर युवाओं से मिलना चाहते हैं और सच में उनकी मदद करनी है तो उनके खाते में पैसे डलवाएं। उन्होंने बताया कि इसका फायदा उन्हें चुनाव में मिला जब उन युवाओं ने उन्हें फुल सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद जब वक्त बदला तो इन युवाओं ने उनकी इस मदद को बुलाया नहीं बल्कि जेल से बाहर आकर इन युवाओं ने पहले उनके पिता सतपाल सांगवान और उसके बाद उनके लिए चरखी दादरी विधानसभा चुनाव में चट्टान बनकर खड़े हो गए।
सुनील सांगवान राजनीति में छोटू राम, देवी लाल और बंसीलाल तीनों के कायल हैं। वह कहते हैं कि छोटू राम ने सभी किसानों के लिए काम किया कभी जात-पात नहीं देखी इसी तरह देवीलाल ने जब बुढ़ापा पेंशन लागू की तो सिर्फ जाटों की नहीं बल्कि पूरे हरियाणा के लोगों के लिए लागू की थी और बंसीलाल ने भी हरियाणा का एक नजर से विकास किया था।
22 साल ब्यूरोक्रेसी में काम करने के बाद राजनीति के मैदान में उतरे सुनील सांगवान ने कहा की अगर ब्यूरोक्रेसी ठीक तरीके से कम करें तो लोगों को राजनीतिक लोगों के पास सिफारिश करवाने के लिए नहीं जाना पड़े। उनका मानना है कि राजनीतिक लोगों के पास आदमी काम करवाने अगर जाता है तो यह मान लेना चाहिए कि ब्यूरोक्रेसी ठीक तरीके से काम नहीं कर रही है। जो काम हमें करना चाहिए था वह काम हमें नेताओं के कहने पर करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह ब्यूरोक्रेसी में थे तो अगर किसी काम की सिफारिश का फोन आता था तो वह अपने स्टाफ को बुलाकर पूछते थे कि इस आदमी को सिफारिश की जरूरत क्यों पड़ी?
सुनील सांगवान ने कहा कि जब वह नौकरी में थे, तो किसी ने कहा था कि जहां रिटायरमेंट के बाद रहना है वहां के लोगों के काम जरूर करने चाहिए मैं होने वाले काम को भी करने का प्रयास जरुर करना चाहिए। ताकि रिटायरमेंट के बाद लोग यह ना कहीं की जब तुम नौकरी में थे तब तो हमारे काम किया नहीं करते थे और अब हमारे बीच में आकर बैठते हो। उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र के लोगों के उचित काम करने में कोई बुराई नहीं है।
सुनील सांगवान पिछले चुनाव के दौरान गुरमीत राम रहीम को लेकर भी चर्चा में रहे थे। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने गुरमीत राम रहीम को छह बार पैरोल और फरलो दी। उनका कहना था कि उन्होंने 2019 में दो बार और 2020 में एक बार राम रहीम की पैरोल एप्लीकेशन को रिजेक्ट किया था। उन्होंने कहा कि जहां तक 6 बार पैरोल देने की बात है तो यह काम उनका नहीं है उनका काम उसकी चिट्ठी को आगे भेजना है और फैसला डिविजनल कमिश्नर का होता है।
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