हरियाणा के भाजपा सांसदों और विधायकों ने सीवर, पेयजल और जलभराव की समस्याओं को उठाया
सीएम और माननीयों की बजट पूर्व बैठक

सत्य खबर हरियाणा
Pre-Budget Meeting : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा के विधायक और सांसदों के साथ बजट को लेकर 4 घंटे तक बैठक की। हालांकि इस बैठक के लिए कांग्रेस, इनेलो और निर्दलीय विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन यह बैठक 70 करोड़ कल की बैठक बनकर रह गई। कांग्रेस ने यह कहकर इस बैठक का विरोध कर दिया था कि इससे पहले जितने भी बैठकें इस प्रकार की हुई हैं सभी में जो भी सुझाव कांग्रेस विधायकों ने दिए हैं उनकी अनदेखी की गई है ऐसे में उनका इस बैठक में जाने का कोई औचित्य नहीं है।
सत्ता पक्ष के सांसद-विधायकों ने अपने क्षेत्रों की समस्याएं और सुझाव रखे। सरकार ने बैठक को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे बजट से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक एजेंडा तय करने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया। बैठक से यह संकेत भी मिले कि इस बार बजट में केवल घोषणाओं के बजाय नीतिगत बदलाव और लंबित समस्याओं के समाधान पर जोर दिया जा सकता है। बैठक के दौरान यह टिप्पणी भी सामने आई कि जो विधायक विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार पर सवाल उठाते हैं, वे बजट जैसे अहम विषय पर चर्चा से दूर रहकर खुद को ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि बजट केवल सरकार का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि प्रदेश की साझा जरूरतों का प्रतिबिंब होता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आगामी बजट हरियाणा की विकास यात्रा को और गति देगा। जनता के एक-एक रुपए का उपयोग पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और प्रगतिशीलता के साथ किया जाएगा। पिछले वर्ष हुए बजट परामर्श में 1592 महत्वपूर्ण सुझाव आए, जिसमें से 706 सुझाव नए बजट में शामिल किया गया है। 6 जनवरी 2026 को बजट सुझावों के लिए AI चैट बॉट लॉन्च किया गया था, इसके द्वारा 9000 से अधिक सुझाव मिल चुके हैं।
सांसदों और विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ प्रदेशव्यापी समस्याएं भी रखीं। कई विधायकों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सीवरेज व्यवस्था, दूषित पानी की निकासी और पेयजल संकट को लेकर ठोस नीति बनाने की जरूरत बताई। विधायकों ने यह भी कहा कि शहरों में अधूरी सीवरेज योजनाएं और गांवों में जलभराव लगातार जनता की परेशानी बढ़ा रहे हैं, जिसके लिए अलग से बजटीय प्रावधान जरूरी है।
मंत्रियों ने मांगा ज्यादा बजट
बैठक में मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों की योजनाओं और परियोजनाओं के लिए बजटीय मांगें रखीं। खेल मंत्री गौरव गौतम ने खेल विभाग के बजट में बढ़ोतरी की मांग करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने शहरी विकास से जुड़े दो अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने महात्मा गांधी ग्राम बस्ती योजना के तहत आवंटित प्लॉटों पर कब्जा न मिल पाने की समस्या का जिक्र किया। कई गांव अब नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्र में आ चुके हैं, जहां लोगों के पास अलॉटमेंट लेटर होने के बावजूद उन्हें प्लॉट नहीं मिले हैं। उन्होंने इसके लिए अलग नीति बनाने का सुझाव दिया। राव नरबीर ने 20-30 साल पुराने भूमि अधिग्रहण मामलों का मुद्दा भी उठाया, जहां मुआवजा नहीं लिया गया और बाद में वहां निजी कॉलोनियां विकसित हो गईं। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों को डी-नोटिफाई करने का प्रस्ताव रखा ताकि वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
एनसीआर के लिए अलग मंत्रालय का प्रस्ताव
सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डॉ़ अरविंद शर्मा ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से आग्रह किया कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से पीएम मोदी से मुलाकात कर इस संबंध में प्रस्ताव रखें। उन्होंने कहा कि एनसीआर का दायरा पहले जहां करीब 90 किलोमीटर तक सीमित था, वह अब बढ़कर 150 किलोमीटर तक पहुंच गया है। दिल्ली से रेवाड़ी, सोनीपत, गोहाना, जींद, भिवानी और अलवर तक का बड़ा क्षेत्र एनसीआर में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली से जुड़े इस विशाल क्षेत्र में कनेक्टिविटी, ट्रैफिक प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था और बढ़ती आबादी के दबाव जैसी समस्याएं लगातार जटिल होती जा रही हैं। इनका समाधान राज्यों के स्तर पर अलग-अलग प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए एक एकीकृत और सशक्त केंद्रीय मंच जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि एनसीआर के लिए अलग मंत्रालय बनने से विकास कार्यों के लिए बड़ी धनराशि सुनिश्चित होगी और रैपिड रेल, मेट्रो विस्तार जैसी परियोजनाओं को गति मिलेगी। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास में भी संतुलन आएगा।
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