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बीजेपी सरकार की कमजोरियों, नाकामियों के चलते हरियाणा निर्यात में पिछड़ा : दीपेन्द्र हुड्डा

भारत सरकार के नीति आयोग की निर्यात तत्परता सूचकांक EPI रिपोर्ट में हरियाणा 5वें स्थान से फिसलकर 10वें स्थान पर पहुंचा

Satyakhabarindia

Satyakhabar, Haryana

Deepender Hooda : सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि भारत सरकार के नीति आयोग ने एक बार फिर हरियाणा की बीजेपी सरकार की नाकामियों को उजागर किया है। नीति आयोग की Export Preparedness Index (EPI) 2024 रिपोर्ट ने बीजेपी सरकार के खोखले विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी है। औद्योगिक राज्य के रूप में देश भर में अलग पहचान रखने वाला हरियाणा नीति आयोग की निर्यात तत्परता सूचकांक (EPI) 2024 रिपोर्ट के अनुसार, समग्र रैंकिंग में गिरकर 10वें स्थान पर पहुँच गया है, जबकि EPI 2021 की रिपोर्ट में यह पाँचवें स्थान पर था। राज्य का स्कोर भी 63.55 से गिरकर 55.01 हो गया है, जो सीधे-सीधे सरकार की नीतिगत विफलता का प्रमाण है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सरकार की विफल विदेश व्यापार नीति और कूटनीतिक असफलता के कारण हरियाणा जैसे औद्योगिक राज्य को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। हरियाणा के उद्योग विदेशी बाजार में बुरी तरह कमज़ोर और असुरक्षित हो गए हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र और राज्य सरकार इस गंभीर संकट पर पूरी तरह चुप हैं। यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया तो आने वाले समय में हरियाणा के औद्योगिक ढांचे को भारी नुकसान होगा।

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दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते हरियाणा से लगातार उद्योग पलायन कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 से अब तक हरियाणा में 1446 फैक्ट्रियां या तो बंद हो गई या पलायन कर गई। पिछले 5 सालों में हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र में 12.2% की गिरावट आई है। कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश में 6 नई IMT (HSIIDC औद्योगिक क्षेत्र) बनवाकर बड़े-बड़े उद्योग स्थापित कराए गए थे, यूपीए सरकार से रेल कोच फैक्ट्री, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसी हजारों करोड़ रुपयों वाली परियोजनाओं को मंजूर करवाया ताकि हरियाणा को तेज औद्योगिक विकास का फायदा मिले और हरियाणावासियों को रोजगार के नए अवसर मिलें। लेकिन, बीजेपी सरकार की नाकामियों व कमजोरी के कारण बड़ी परियोजनाएं एक-एक करके हरियाणा से बाहर चली गई।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा का निर्यात तंत्र कुछ चुनिंदा सेक्टरों पर निर्भर है। जिनपर बीजेपी सरकार की कमजोरी से अमेरिकी टैरिफ की भयंकर चोट पड़ी है। हरियाणा में अमेरिकी टैरिफ हमले से हजारों करोड़ के एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों पर तालाबंदी और इनसे जुड़े लाखों कामगारों के रोज़गार पर खतरे के काले बादल छा गए हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 फ़ीसदी का भारी टैरिफ थोपने के बाद न केवल एक्सपोर्ट आधारित उद्यम संकट झेल रहे हैं। हरियाणा की टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फुटवियर, ऑटो पार्ट्स, स्टील, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, फार्मा समेत अन्य इंडस्ट्री अमेरिकी टैरिफ हमले से बुरी तरह प्रभावित हुई है। करीब एक तिहाई ऑर्डर रद्द हो चुके हैं। उद्योगों से जुड़े लोगों का कहना है कि नये ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, पहले के जो ऑर्डर थे वो एक एक करके कैंसिल हो रहे हैं और फैक्ट्री का उत्पादन ठप हो गया है। टैरिफ का दुष्प्रभाव रोहतक, सोनीपत, हिसार, करनाल, अंबाला, रेवाड़ी के उद्योगों पर भी पड़ा है।

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उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसा कोई सेक्टर नहीं है जहां से लगातार गिरावट की खबरें न आ रही हों। मंदी की मार झेल रहे टेक्सटाइल व ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़े हजारों छोटे-मझोले उद्योग भी संकट में हैं, प्रदेश के टेक्सटाइल, गारमेंट, रत्न आभूषण, चमड़ा व जूते चप्पल, पशु उत्पाद, रसायन, वैज्ञानिक उपकरण, स्पोर्ट्स गुड्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद से जुड़े व्यापारियों व कामगारों को इस खतरे से बचाने के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है।

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