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पुलिस भर्ती को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सामान्य श्रेणी से ज्यादा अंक वाले आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों का होगा पीएमटी और पीएसटी

सामान्य श्रेणी की कट ऑफ सबसे नीचे रहने के कारण बनी अजीब परिस्थितियां

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

High Court interim decision : पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के एक अंतरिम फैसले से उन हजारों आवेदकों को राहत की सांस मिली है जो पुलिस भर्ती के इच्छुक है और उनको इसके लिए बुलाया नहीं गया था। हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में आरक्षित श्रेणी के उन सभी लोगों को प्रोविजनल तौर पर पीएमटी और पीएसटी के लिए पात्र मान लिया है जिनके अंक सामान्य श्रेणी की कट ऑफ से ज्यादा हैं। बता दें कि हरियाणा में 5500 पुलिस कर्मचारियों की भर्ती के लिए एक सीट पर 15 आवेदकों को बुलाया गया तो कट ऑफ लिस्ट सामान्य श्रेणी की सबसे कम रह गई और आरक्षित श्रेणी की कट ऑफ काफी ऊंची चली गई। इसी बात को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के बाद आज अदालत ने अपना अंतरिम निर्णय जारी कर दिया।

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मामले की सुनवाई जस्टिस जे एस पुरी की अदालत में हुई। कोर्ट के समक्ष दायर याचिकाओं में अभ्यर्थियों के वकील रजत मोर ने कहा कि उन्होंने हरियाणा पुलिस में पुरुष कांस्टेबल (जीडी) और पुरुष कांस्टेबल (जीआरपी) पदों के लिए आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले सीईटी-1 आयोजित किया गया, जो केवल शॉर्टलिस्टिंग के उद्देश्य से था। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 40 प्रतिशत अंक निर्धारित थे।

वकीलों ने अदालत को क्या बताया?

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि सभी अभ्यर्थियों ने आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त कर सीईटी-1 उत्तीर्ण कर लिया था और वे सीईटी-2 के लिए पात्र हो गए थे। बाद में उन्हें शारीरिक माप परीक्षण (पीएमटी) के लिए नहीं बुलाया गया। उनका कहना था कि सीईटी-2 के लिए अलग से श्रेणीवार कट-ऑफ लागू कर दी गई, जिसके कारण उन्हें बाहर कर दिया गया, जबकि उनके अंक सामान्य वर्ग के कट-ऑफ 52.1796687 से अधिक थे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि यदि किसी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार के अंक सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक हैं, तो उसे सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में माना जाना चाहिए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले “राजस्थान हाईकोर्ट बनाम रजत यादव” का हवाला भी दिया गया, जिसमें कहा गया था कि चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में उम्मीदवारों पर पहले ओपन/जनरल कैटेगरी के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।

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वहीं, हरियाणा सरकार की ओर से तथा हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से अधिवक्ता संजीव कौशिक ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि भर्ती नियमों के अनुसार प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग मानक तय हैं और शॉर्ट-लिस्टिंग भी श्रेणीवार ही की जानी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। साथ ही अदालत ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ताओं ने सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं और सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय भी उनके पक्ष में है, इसलिए उन्हें फिलहाल सीईटी-2 परीक्षा में प्रोविजनल रूप से भाग लेने दिया जाए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत अंतिम अधिकार नहीं मानी जाएगी और अंतिम निर्णय मामले के निपटारे के समय लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को होगी।

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