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अब चंडीगढ़ में अपात्र सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा सरकारी आवास

सरकार पोर्टल में करने जा रही बड़े बदलाव, अपात्र लोगों से वसूला जाएगा जुर्माना और ब्याज

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Haryana Housing Policy : प्रदेश में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में लगी हुई है। प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को चंडीगढ़ में आवास को लेकर हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है और उसमें भी कई बार अपात्र व्यक्ति लाभ ले जाते हैं और पात्र देखते रह जाते हैं। इस बात को दूर करने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा था जिसका परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेगा।

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चंडीगढ़ में सरकारी आवास आवंटन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हरियाणा सरकार ने सरकारी मकानों के आवंटन को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ई-आवास पोर्टल पर नया ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए सभी विभागों को निर्धारित समयावधि में जरूरी विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदन, सत्यापन और पात्रता जांच डिजिटल तरीके से होगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, हरियाणा लोक सेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, हरियाणा विधानसभा, हरियाणा पुलिस और अन्य प्रमुख कार्यालयों को पत्र जारी किया है। विभागों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने और तय समय सीमा में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

अब आवेदन के साथ हार्ड कॉपी की निर्भरता घटेगी

वर्तमान व्यवस्था में पात्र कर्मचारियों को सरकारी आवास आवंटन या आवास परिवर्तन के लिए ई-आवास पोर्टल पर आवेदन करने के साथ संबंधित विभाग से सत्यापित हार्ड कॉपी भी जमा करनी पड़ती है। प्रत्येक माह की 20 तारीख तक प्राप्त आवेदन अगले आवंटन चक्र में शामिल किए जाते हैं। अधूरे अथवा अपात्र आवेदन निरस्त किए जा सकते हैं।

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सरकार को मिलीं प्रक्रिया में खामियां

हाउस अलॉटमेंट कमेटी की समीक्षा में सामने आया कि ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने के बावजूद कई आवेदन निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया के बिना भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण तथा पदस्थापन का रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं होने से कई अपात्र कर्मचारी वरिष्ठता सूची में बने रहते हैं। कुछ मामलों में पात्रता समाप्त होने के बाद भी सरकारी आवासों पर कब्जा जारी रहने की स्थिति सामने आई है। ऐसे मामलों में नियमानुसार दंडात्मक किराया और ब्याज वसूली का प्रावधान भी लागू हो सकता है।

रियल टाइम अपडेट से तय होगी पात्रता

प्रस्तावित ऑनलाइन मॉड्यूल के तहत विभागाध्यक्ष अथवा नामित नोडल अधिकारी डिजिटल सत्यापन के बाद आवेदन आगे बढ़ाएंगे। स्थानांतरण और पदस्थापन संबंधी रिकॉर्ड रियल टाइम अपडेट होगा। वरिष्ठता सूची स्वतः अपडेट होगी और अपात्र कर्मचारियों की पहचान आसान होगी।

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एनआईसी शुरू करेगा विकास कार्य

मॉड्यूल लागू करने के लिए विभागों से कार्यालयों का विवरण, विभागाध्यक्ष का नाम, आधिकारिक ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और डीडीओ कोड सहित जानकारी सात दिन के भीतर मांगी गई है। यह डेटा मिलने के बाद एनआईसी चंडीगढ़ पोर्टल के विकास और क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू करेगा। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से सरकारी आवास आवंटन प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी होगी।

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