मनीषा के पिता का अनशन स्थल बना कुड़ल बास
बोले, पुलिस ने जिसे जहां रोका वहीं लगाएं धरना

सत्य खबर हरियाणा
Manisha Murder Mystery : भिवानी में कुड़ल बास गांव के पास पुलिस ने मनीषा के पिता संजय व अन्य को रोक लिया। जिसके बाद महिलाओं ने हंगामा किया। मनीषा के पिता संजय ने वहीं आमरण अनशन शुरू कर दिया है। मनीषा के पिता का कहना है कि बेटी की मौत को 10 महीने हो चुके हैं। CBI ने अभी तक इस मामले का खुलासा नहीं किया कि उसकी मौत कैसे हुई।

मनीषा के पिता संजय ने कहा कि प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए मुझे DC ऑफिस तक नहीं जाने दिया। इसलिए मैं कुड़ल बास गांव में ही आमरण अनशन पर बैठ गया हूं। मेरे पिता और अन्य साथी डीसी ऑफिस के पास पहुंच चुके हैं और वहीं धरने पर बैठ गए हैं। जिन लोगों को रास्ते में रोका गया है, वे भी वहीं धरने पर बैठ जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि मुझे आगे नहीं जाने दिया गया तो सभी लोग यहीं एकत्रित होंगे। प्रशासन से हमारी बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा था कि आपके पांच लोग डीसी ऑफिस आकर बात कर सकते हैं, लेकिन भीड़ को आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए हमने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन अब तक कोई खुलासा नहीं हुआ है।
भिवानी में लेडी टीचर मनीषा के पिता संजय कुमार को DC ऑफिस के सामने आमरण अनशन पर बैठना था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में कुड़ल गांव के पास रोक लिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अनशन की अनुमति नहीं मिली है।
इसके बाद संजय के साथ मौजूद ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। कुछ महिलाएं सड़क पर ही रोने लगीं। इसके बाद ग्रामीण वहीं बैठ गए। विरोध को देखते हुए कुड़ल बास गांव में पुलिस फोर्स तैनात की गई। लोहारू SDM मनोज कुमार ग्रामीणों को समझाने के लिए पहुंचे।
उधर, DC ऑफिस में पहले से मौजूद कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया और अन्य समर्थकों को भी पुलिस ने वहां से हटा दिया। इस दौरान उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई। यहां भी पुलिस अलर्ट है।
एक ओर जहां पुलिस ने ग्रामीणों को आगे बढ़ने से रोका वहीं इतनी गर्मी में कुड़ल बास गांव में धरने पर बैठे लोगों को महिला पुलिसकर्मी कोल्ड ड्रिंक पिलातीं नजर आईं। अनशन में साथ देने पहुंचे लोगों का हाथ जोड़कर मनीषा के पिता संजय धन्यवाद करते हुए नजर आए।
किसान नेता बोले, प्रशासन-सरकार तानाशाही कर रही
कुड़ल बास गांव में धरने पर पहुंचे किसान नेता सुरेश कौथ ने कहा, प्रशासन और सरकार तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। मनीषा के पिता और उनके साथियों को रोकने के कारण हमने कुड़ल बास में ही आमरण अनशन शुरू कर दिया है। यदि कोई व्यक्ति अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए भी आवाज नहीं उठा सकता, तो फिर लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाता है? उसकी पिता न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। प्रशासन को इसे समझना चाहिए।
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