आमरण अनशन पर जा रहे हैं मनीषा के पिता को पुलिस ने बीच रास्ते रोका, स्थिति तनावपूर्ण
सड़क पर महिलाओं का हंगामा, भिवानी में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रदर्शन

सत्य खबर हरियाणा
Manisha Murder Mystery : भिवानी की शिक्षक मनीषा मौत मामले में अनशन करने लघु सचिवालय जा रहे मृतका के पिता संजय कुमार व अन्य ग्रामीणों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। उनकी गाड़ियां नहीं निकलने दी गई। अनशन की अनुमति न मिलने के बावजूद जब मनीषा के पिता संजय कुमार और ग्रामीण लघु सचिवालय की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस द्वारा गाड़ियां रोके जाने और सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों को खदेड़े जाने के बाद, महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने बीच सड़क पर जोरदार हंगामा किया।

वहीं लघु सचिवालय के बाहर धरना देने पहुंचे विभिन्न संगठनों के सदस्यों, कांग्रेस शहरी अध्यक्ष प्रदीप जोगी को पुलिस ने लघु सचिवालय के बाहर धरना नहीं देने दिया गया। उन्हें लघु सचिवालय गेट से दूर चौ. सुरेंद्र सिंह वाटर कंजर्वेशन पार्क के पास छोड़ा, जहां विभिन्न संगठनों ने धरना देकर रोष जताया।
विवाद के चलते सोमवार को भिवानी में तनावपूर्ण माहौल रहा। प्रशासन ने पहले से ही स्थिति को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी और सुबह से ही क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
संजय अपने साथ विभिन्न किसान एवं सामाजिक संगठनों के करीब 20 से 25 समर्थकों के साथ घर से रवाना हुए। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रास्ते में रोकने का प्रयास किया, लेकिन समर्थकों के साथ वे पैदल ही दिल्ली-पिलानी राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर बढ़ गए। तेज धूप, उमस भरी गर्मी और भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच प्रदर्शनकारी दोपहर तक गांव कुड़लबास के समीप पहुंच गए।
वहां एक पेड़ की छांव में सभी ने कुछ देर विश्राम किया, चाय-पानी पिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक मनीषा मौत मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
लोहारू के एसडीएम मनोज दलाल ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर अधिकारियों से वार्ता कराने का भरोसा दिलाया, लेकिन प्रदर्शनकारी निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष बोले, सरकार किसी को बचा रही
कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया ने कहा कि मनीषा को न्याय दिलाने के लिए लगातार धरने दिए जा रहे हैं, जिनमें सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हो रहे हैं। पिछली महापंचायत में फैसला लिया गया था कि 29 जून की सुबह मनीषा के पिता संजय भिवानी के लघु सचिवालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज जब संजय अनशन के लिए निकले तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। वहीं, लघु सचिवालय पहुंचे अन्य लोगों को भी जबरन वहां से हटा दिया गया। सरकार गुंडागर्दी पर उतर आई है। ऐसा लगता है कि सरकार किसी को बचाना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वे शांतिपूर्ण तरीके से डीसी कार्यालय के बाहर बैठ रहे थे, तो इसमें आखिर क्या दिक्कत थी।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि भिवानी जिला के ढाणी लक्ष्मण गांव निवासी 19 वर्षीय मनीषा बीते साल 11 अगस्त को लापता हुई थी। दो दिन बाद 13 अगस्त को खेतों में उसका शव मिला था। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी और पुलिस पर समय रहते तलाश न करने के आरोप लगाए। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ा की परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया। आनन फानन में लोहारू थाना के सभी कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया। एसपी का तबादला किया गया। पर परिवार ने शव नहीं लिया। गांव में महापंचायत चलती रही। कई दिन बीत जाने पर सरकार ने केस सीबीआई को दिया तो परिजनों ने मनीषा का 21 अगस्त को अंतिम संस्कार किया। केस सीबीआई को जाने के बाद सीबीआई टीम कई बार गांव जाकर परिजनों और केस से जुड़े संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर चुकी है। वहीं अब 10 माह से भी ज्यादा समय बीत चुका है। अब तक ना कोई खुलासा और ना कोई गिरफ्तारी हुई है।
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