ताजा समाचार

NIA का विस्तार 23 संगठन बैन सरकार ने लोकसभा में दी बड़ी जानकारी

Satyakhabarindia

राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को लेकर लोकसभा में बड़ा खुलासा हुआ है। गृह मंत्रालय ने बताया कि पिछले कुछ सालों में सरकार ने एनआईए को बेहद मजबूत बनाया है और आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया जा रहा है। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि एनआईए की स्थापना 26/11 मुंबई हमले के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम 2008 के तहत की गई थी ताकि देश में आतंकवाद से जुड़े मामलों की केंद्रीय स्तर पर जांच की जा सके।

सरकार ने बताया कि राष्ट्र की संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसलिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 यानी UAPA के तहत बड़ी संख्या में प्रतिबंध लगाए गए हैं। पिछले पांच साल में सरकार ने 23 संगठनों को गैरकानूनी घोषित किया है जिनमें PFI, SIMI, LTTE, ULFA और कई अन्य चरमपंथी संगठन शामिल हैं।

मनीषा के पिता का अनशन स्थल बना कुड़ल बास

सिमी, उल्फा, ATTF, PLA, KYKL, NSCN(K), JKLF, SFJ जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाना इस बात का संकेत है कि सरकार आतंकवादी नेटवर्क और अलगाववादी गतिविधियों को खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। इतना ही नहीं, कश्मीर के कई संगठन जैसे जमात-ए-इस्लामी, जेकेएलएफ, JKDFP, MLJK-MA, TeH और कई अन्य गुट भी UAPA के तहत बैन किए गए हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार एनआईए को अब न सिर्फ आतंकवाद बल्कि मानव तस्करी, हथियारों की तस्करी, नकली मुद्रा, साइबर टेरर और अंतरराज्यीय संगठित अपराध से जुड़े मामलों की भी जांच करने की शक्ति दी गई है। एनआईए की शक्तियों के विस्तार का उद्देश्य है कि देशभर में किसी भी राज्य में यदि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला सामने आए तो एजेंसी बिना किसी देरी के कार्रवाई कर सके।

हरियाणा के जल अधिकारों का सौदा नहीं होने देंगे, एक-एक बूंद की रक्षा के लिए लड़ेगी इनेलो : प्रो. संपत सिंह

सरकार के इस जवाब से साफ है कि आने वाले वर्षों में एनआईए को और भी तकनीकी, कानूनी और ऑपरेशनल मजबूती देने की योजना है ताकि आतंकवाद और गैरकानूनी गतिविधियों का देश से पूरी तरह सफाया हो सके।

राजस्थान और हरियाणा में हुआ जल समझौता, राजस्थान को मिलेगा उसके हाथ का पानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button