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पंचकूला की रामगढ़ रेंज में हाई-कैलिबर बमों का सफल ट्रायल

हवा में डेढ़ किलोमीटर ऊपर तक गए टुकड़े, 6 किलोमीटर दूर तक हिले दरवाजे और खिड़कियां

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

DRDO Bomb Test : हरियाणा के पंचकूला जिले के रामगढ़ स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की इकाई टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) में रविवार को हाई कैलिबर बमों का सफल परीक्षण किया गया। परीक्षण को लेकर पहले से ही जिला प्रशासन, पुलिस और टीबीआरएल द्वारा व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। पहला धमाका 11 बजकर 20 मिनट पर हुआ और उसके बाद 11 बजकर 24 मिनट पर दूसरा धमाका हुआ। ट्रायल की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। प्रशासन ने भानु और बिल्ला गांव के निवासियों को रविवार सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक घरों के भीतर रहने के निर्देश दिए गए थे। यह ट्रायल वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और निगरानी में संपन्न हुआ।

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रामगढ़ स्थित टीबीआरएल रेंज में होने वाले बम परीक्षण को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आईं। सुरक्षा के मद्देनज़र गांव बिल्लाभानु मार्केट में पुलिसकर्मियों ने दुकानों को बंद करवाया तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी। इस दौरान पुलिस की टीमें इलाके में जगह-जगह गश्त करती दिखाई दीं। प्रशासन द्वारा किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से सहयोग बनाए रखने और जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, परीक्षण के दौरान विस्फोटक सामग्री के टुकड़े लगभग डेढ़ किलोमीटर तक उड़ सकते थे। इसी संभावित खतरे को देखते हुए परीक्षण स्थल के आसपास करीब दो किलोमीटर के क्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील घोषित किया गया था।

 

सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी थी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। परीक्षण के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया और ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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रक्षा अनुसंधान से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के परीक्षण देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने और उन्नत हथियार प्रणालियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

6 किलोमीटर दूर तक हिले दरवाजे और खिड़कियां

हरियाणा के पंचकूला के रामगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) में आज हाई कैलिबर बम का सफल परीक्षण किया गया। यह ट्रायल भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच संपन्न हुआ। इस महाधमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी। धमाके का असर इतना जबरदस्त था कि परीक्षण स्थल से करीब 6 किलोमीटर दूर तक के घरों की खिड़कियां और दरवाजे हिल गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस हाई-पावर ब्लास्ट के कारण बम के स्प्लिंटर्स (छर्रे और मलबा) हवा में करीब 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक गए। जमीन पर ब्लास्ट पॉइंट से 2 किलोमीटर के दायरे को डेंजर ज़ोन (स्प्लिंटर डेंजर ज़ोन) बनाया गया था।

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हाई-कैलिबर बम बहुत बड़े, भारी और अत्यधिक विनाशकारी पारंपरिक या परमाणु विस्फोटक होते हैं। सैन्य और रक्षा अनुसंधान (जैसे DRDO) इनका उपयोग हथियारों की क्षमता, विस्फोट की तीव्रता और इमारतों को नष्ट करने की ताकत का परीक्षण करने के लिए करते हैं। ये सामान्य बमों की तुलना में काफी बड़े होते हैं और इनमें भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भरी जाती है। इनमें होने वाला विस्फोट बहुत शक्तिशाली होता है और इनके टुकड़े (स्प्लिंटर्स) आसमान में 1.5 किलोमीटर तक और जमीन पर कई किलोमीटर के रेडियस में जा सकते हैं। ऐसे परीक्षणों के दौरान 2 किलोमीटर तक के दायरे को ‘डेंजर ज़ोन’ घोषित कर दिया जाता है और आम लोगों को घरों के अंदर रहने की सख्त हिदायत दी जाती है।

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