श्रम विभाग में फर्जी वर्क स्लिप घोटाले की अब 2008 से लेकर होगी जांच
2 साल में 1500 करोड रुपए का घोटाला आया सामने

सत्य खबर हरियाणा
Farji Work Slip Scam : हरियाणा के श्रम विभाग में श्रमिकों के फर्जी पंजीकरण मामले में जहां दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध एक्शन की तैयारी में है वहीं अब इस मामले में 2008 से लेकर अब तक की पूरी जांच की तैयारी चल रही है। अभी तक यह घोटाला करीब 1500 करोड रुपए का माना जाता है लेकिन अगर 2008 से लेकर अब तक की पूरी जांच हुई तो यह घोटाला इससे कहीं ज्यादा का हो सकता है।

सरकार इस बात की भी तैयारी कर रही है कि जिन लोगों ने फर्जी वर्क स्लिप के सहारे मजदूरी कॉपी बनवाने का काम किया है और उससे लाभ लिया है उन लोगों से उस लाभ को वापस लिया जाए। प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल विज इस मामले को लेकर काफी सक्रिय नजर आते हैं।
श्रम विभाग के सूत्रों का कहना है कि पहले जहां जिलों में श्रमिकों के पंजीकरण और श्रमिकों के नाम पर दिए जाने वाले लाभकारी स्कीमों के नाम पर गोलमाल कर बड़ी मोटी धनराशि डकारी गई। अब श्रम विभाग में चलने वाले अन्य खेल को लेकर भी श्रम मंत्री गंभीर नजर आ रहे हैं, बताया जा रहा है कि कुछ अन्य स्कीमों और निर्माण कार्यों और श्रमिकों के नाम पर कुछ अन्य स्कीमों भी बड़ा खेल किया गया। जिन स्कीमों का फायदा श्रमिकों को होना चाहिए था, उनके नाम पर बिचौलिये खेल कर गए। मंत्री विज की इस तरह के खेल के पीछे की काली भेड़ों पर नजर चली गई है, आने वाले दिनों में वर्क स्लिप की तरह से ही कुछ अन्य गोलमाल पर भी जांच के आदेश किए जा सकते हैं।
मजदूरों के हकों पर डाका
याद दिला दें कि हरियाणा में मजदूर कल्याण योजनाओं में पहले ही पंजीकरण और वर्क स्लिप के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आ चुका है। पूरे मामले में गंभीरता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने एक जांच कमेटी गठित कर दी थी और पूरे मामले पड़ताल के बाद यह भी साफ हुआ है कि 1500 करोड़ से अधिक की राशि का खेल हो गया। जांच पड़ताल किसी निजी एजेंसी ने नहीं बल्कि विभिन्न जिलों के डीसी की अध्य़क्षता में कराई गई थी। जिसमें 90 फीसदी से अधिक वर्क स्लिप फर्जी पाई गईं हैं। कई जिलों में तो 97 फीसदी तक गड़बड़ी मिली थी। उपायुक्तों की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हो चुके हैं। कई जिलों में 87.6% से 97 फीसदी तक वर्क स्लिप फर्जी पाई गई हैं। ये स्लिप 90 दिन के काम का प्रमाण होती हैं। जिस पर योजनाओं का लाभ मिलता है।
आंकड़ों पर गौर करें, तो कुल 21,78,523 वर्क स्लिप की जांच की गई है, जिसमें 19,07,578 वर्क स्लिप फर्जी पाई गईं हैं और केवल 2,70,945 वर्क स्लिप सही मिली हैं। अगर जिलों की बात करें तो ज्यादा फर्जीवाड़ा कैथल में हुआ है जहां 98.91 प्रतिशत वर्क स्लिप फर्जी पाई गई हैं। दूसरे नंबर पर यमुनानगर है जहां 98.67 फीसद वर्क स्लिप फर्जी पाई गई। इसके अलावा पानीपत में 98.20 फीसदी, जबकि फरीदाबाद में 97.05 फीसदी व नूंह में 97.90 फीसदी संख्या के हिसाब से टॉप जिलों में आते हैं।
हिसार में 98,615, कैथल में 2,22,490, जींद में 2,10,875, भिवानी में 1,92,473 और नूंह में 1,25,955 वर्क स्लिप फर्जी पाई गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी मजदूरों का पंजीकरण किया गया। बिना काम के वर्क स्लिप जारी की गईं । एक फर्जी लाभार्थी ने करीब 2.5 लाख रुपए तक का फायदा उठा लिया।
इस मामले का खुलासा जींद के एक व्यक्ति ने किया था, इसके बाद श्रम मंत्री ने खुद गड़बड़ी को पकड़ा और प्रारंभिक जांच के आदेश दिए। जबकि जनवरी में मुख्यमंत्री ने हाई लेवल कमेटी गठित कर दी थी। जिला स्तर पर डीसी की अगुवाई में टीमों ने पिछले दो साल के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन किया। सत्यापित मजदूरों की आईडी दोबारा सक्रिय करने के लिए पोर्टल खोला जाएगा मजदूरों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा और पूरी रिपोर्ट की समीक्षा उच्च स्तरीय कमेटी कर रही है।
श्रम मंत्री अनिल विज के अनुसार, पिछले दो साल में घोटाला 1500 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। 2008 से लेकर अब तक रिकॉर्ड की जांच में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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