कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर मचा बवाल, चुप हैं मनोज झा

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 3 जून को आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस अब राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है। इस कार्यक्रम के लिए अनुमति दिलाने को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा द्वारा लिखी गई एक चिट्ठी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो रही है। जानकारी के अनुसार मनोज झा ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के निदेशक को पत्र लिखकर पत्रकार सौरभ दास के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने हेतु स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। हालांकि इस पत्र में कहीं भी कॉकरोच जनता पार्टी का नाम दर्ज नहीं है। इसी वजह से अब कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस कार्यक्रम के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और अनुमति किस आधार पर दी गई।
मनोज झा की चुप्पी ने बढ़ाई अटकलें
पूरा विवाद सामने आने के बाद भी सांसद मनोज झा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उनकी चुप्पी ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चित बना दिया है। दूसरी ओर पत्रकार सौरभ दास को हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना पहले से राजनीतिक रूप से जुड़ी हुई थी या फिर यह केवल पत्रकार के नाम पर बुक किया गया एक सामान्य कार्यक्रम था। सोशल मीडिया पर विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी व्याख्याएं पेश कर रहे हैं और इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है।

6 जून के प्रदर्शन की तैयारियों ने बढ़ाई हलचल
कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का दावा है कि इस आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और चर्चित व्यक्तित्वों का समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके के अमेरिका से दिल्ली पहुंचने पर एयरपोर्ट पर विशेष स्वागत कार्यक्रम की भी तैयारी की जा रही है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। हालांकि विरोधी पक्ष इसे केवल प्रचार हासिल करने की रणनीति बता रहा है। प्रदर्शन की घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में भी इस संगठन को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है।
सोशल मीडिया से राष्ट्रीय चर्चा तक का सफर
कॉकरोच जनता पार्टी की पहचान शुरुआत में सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से बनी थी। यह संगठन उस समय अचानक चर्चा में आया जब सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश से जुड़ी एक टिप्पणी के बाद इसके नाम और गतिविधियों को लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक बहस शुरू हो गई। धीरे-धीरे इस संगठन ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू की और अब यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित विषय बन चुका है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और उससे जुड़ी चिट्ठी ने एक बार फिर इस संगठन को सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की नजरें मनोज झा की संभावित प्रतिक्रिया और 6 जून को होने वाले प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं क्योंकि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।