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Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती, उन्नाव रेप केस में CBI की सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल

Satyakhabarindia

Delhi News: उन्नाव रेप मामले में एक बार फिर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस हाई-प्रोफाइल केस में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। CBI ने Special Leave Petition (SLP) दाखिल कर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा आरोपी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित कर जमानत दिए जाने के फैसले को चुनौती दी है। यह SLP 26 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई। CBI का कहना है कि इस मामले में सजा निलंबन और जमानत पीड़िता के अधिकारों और न्याय की भावना के खिलाफ है।

कुलदीप सिंह सेंगर को कितनी सजा मिली थी?

गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर को दिसंबर 2019 में उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। यह फैसला दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने सुनाया था। इसके बाद सेंगर ने जनवरी 2020 में इस सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी, जो अभी तक लंबित है। इसी अपील के लंबित रहने के दौरान, सेंगर ने मार्च 2022 में सजा निलंबन (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) और जमानत की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक अलग अर्जी दाखिल की थी।

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दिल्ली हाईकोर्ट से कैसे मिली जमानत?

कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबन याचिका का CBI और पीड़िता की ओर से जोरदार विरोध किया गया था। दोनों पक्षों ने कोर्ट में दलील दी थी कि मामला अत्यंत गंभीर है और आरोपी का राजनीतिक प्रभाव रहा है, जिससे पीड़िता की सुरक्षा पर खतरा हो सकता है। इसके बावजूद, 23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने अपील के अंतिम निपटारे तक सेंगर की सजा निलंबित करते हुए उसे सशर्त जमानत दे दी। हाईकोर्ट के इस फैसले को लेकर कई कानूनी और सामाजिक हलकों में सवाल उठाए गए, जिसके बाद CBI ने आदेश की विस्तृत समीक्षा की और सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल करने का फैसला किया।

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CBI की SLP और जमानत की शर्तें

CBI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी SLP में कहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश न्याय के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और इससे पीड़िता के अधिकार प्रभावित होते हैं। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल जेल में ही है, क्योंकि उसे एक अन्य मामले में CBI द्वारा हत्या के आरोप में 10 साल की सजा भी सुनाई जा चुकी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देते समय सेंगर पर कई सख्त शर्तें भी लगाई थीं। कोर्ट ने आदेश दिया कि वह पीड़िता के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा, न ही पीड़िता या उसकी मां को किसी भी तरह से धमकी देगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इन शर्तों का उल्लंघन किया गया, तो उसकी जमानत स्वतः रद्द मानी जाएगी। अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

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