विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अमेरिका में भारतीय दूतावासों की मेहनत की सराहना, भारत-अमेरिका साझेदारी हुई मजबूत

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अमेरिका में आयोजित भारतीय महावाणिज्य दूतों की सम्मेलन में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने भारत के दूतावास और महावाणिज्य दूतावासों के कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता की सराहना की, जिन्होंने दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
महावाणिज्य दूतों का सम्मेलन: अमेरिका के विभिन्न शहरों से प्रतिनिधि
यह सम्मेलन अमेरिकी धरती पर भारत के विभिन्न महावाणिज्य दूतावासों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ। इसमें अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा, वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के उप प्रमुख नमग्या खम्पा के साथ-साथ अटलांटा, बॉस्टन, शिकागो, ह्यूस्टन, लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल के महावाणिज्य दूतों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव से भेंट: वैश्विक मुद्दों पर चर्चा
एक दिन पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भेंट की। इस महत्वपूर्ण मुलाकात में भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश, उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत योजना पटेल और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के अधिकारी भी मौजूद थे। इस बैठक में वैश्विक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत-अमेरिका साझेदारी: आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में बढ़त
विदेश मंत्री जयशंकर ने सम्मेलन में बताया कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी निरंतर गहरी हो रही है। दोनों देशों का सहयोग केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, तकनीकी, जलवायु परिवर्तन और शिक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल चुका है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी को और मजबूती देने के लिए दूतावास और महावाणिज्य दूतावास की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आगे की चुनौतियाँ और अवसर
जयशंकर ने यह भी कहा कि दुनिया में बदलाव के बीच भारत-अमेरिका संबंधों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में सहयोग और संवाद को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने महावाणिज्य दूतों से आग्रह किया कि वे दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संपर्कों को बढ़ाने के लिए लगातार काम करें। भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए अवसर सामने आएंगे, जिन्हें भुनाने की जरूरत है।