India-Germany Relations: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का पहला भारत दौरा, मोदी से अहम रणनीतिक वार्ता तय

India-Germany Relations: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ 12 और 13 जनवरी को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत आ रहे हैं। जर्मनी का चांसलर बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। इस यात्रा की शुरुआत गुजरात के अहमदाबाद से होगी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है। 12 जनवरी को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मन चांसलर का स्वागत करेंगे। इसके बाद चांसलर मर्ज़ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु भी जाएंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और जर्मनी के रणनीतिक संबंधों को 25 साल पूरे हो चुके हैं, जिससे इस यात्रा का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ जाता है।
द्विपक्षीय वार्ता और रणनीतिक सहयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें भारत और जर्मनी के रणनीतिक संबंधों के कई अहम आयामों पर चर्चा की जाएगी। बातचीत में व्यापार और निवेश को मजबूत करने, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, कौशल विकास और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही रक्षा, सुरक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, हरित और सतत विकास, और लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। दोनों नेता बिजनेस और इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों के दृष्टिकोण साझा किए जाएंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी तालमेल और मजबूत हो सके।

मुक्त व्यापार समझौता और वैश्विक मंचों पर साझेदारी
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। ऐसे में जर्मन चांसलर का यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए वार्ता को नई गति दे सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस समझौते को लेकर कोई बड़ा ऐलान भी हो सकता है। जर्मनी यूरोप में भारत के सबसे अहम साझेदारों में से एक है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिसने जर्मनी के संघीय गणराज्य के साथ संबंध स्थापित किए। साल 2000 से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का स्तर तय हुआ। आज जर्मनी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत तेजी से आगे बढ़ती हुई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार के मुद्दे पर भी भारत और जर्मनी, जी4 ढांचे के तहत एक दूसरे का समर्थन करते हैं।
आर्थिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों की मजबूती
भारत और जर्मनी के आर्थिक संबंध काफी मजबूत हैं। साल 2023–24 में जर्मनी भारत का 12वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 33 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। रेलवे और परिवहन क्षेत्र में जर्मनी की कंपनी Siemens भारत में बड़े स्तर पर काम कर रही है, जिसमें इलेक्ट्रिक इंजनों की आपूर्ति और लंबे समय तक रखरखाव जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा कृषि, कोल्ड चेन, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग जारी है। जर्मनी को कुशल श्रमिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में, जहां भारतीय पेशेवरों की मांग बढ़ रही है। सांस्कृतिक स्तर पर भी सिस्टर स्टेट और सिस्टर सिटी समझौतों के ज़रिये रिश्ते गहरे हो रहे हैं। जर्मनी में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं। कुल मिलाकर, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का यह भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों में नई गर्मजोशी और नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।