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लुटियंस दिल्ली क्लब खाली करने के आदेश पर कानूनी विवाद तेज हुआ

Satyakhabarindia

दिल्ली हाईकोर्ट ने लुटियंस दिल्ली स्थित जिमखाना क्लब को खाली करने के केंद्र सरकार के आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 8 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला राजधानी के प्रतिष्ठित क्लब से जुड़ा होने के कारण कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया है।

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दलीलें

मंगलवार को हुई सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल भी अदालत में पेश हुए। उन्होंने याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील रखते हुए कहा कि सरकार द्वारा किसी संस्था पर कब्जे का अधिकार देने वाला आदेश संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक बार सरकार परिसर में प्रवेश कर लेती है तो बाद में उसे हटाना मुश्किल हो जाता है, जिससे कानूनी संतुलन बिगड़ सकता है।

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केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए सवाल

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में याचिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस “पूर्व समिति” का हवाला दिया जा रहा है, उसका कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है। अदालत ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी जा रही है, उन्हें पहले ही पद से हटाया जा चुका है, इसलिए उनकी स्थिति पर सवाल उठता है।

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NCLT और NCLAT फैसलों का भी हुआ जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल पहले ही इस मामले में आदेश पारित कर चुके हैं। वर्ष 2020 में इन दोनों मंचों ने संबंधित समिति को हटाने का निर्णय बरकरार रखा था। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से स्पष्ट पूछा कि वे सदस्य की हैसियत से याचिका दाखिल कर रहे हैं या किसी पूर्व समिति के प्रतिनिधि के रूप में, जिससे मामले की कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो सके।

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