राष्‍ट्रीय

Mohan Bhagwat ने दिया चेतावनी जैसा संदेश—‘अलगाव ने छीनी पहचान’, युवाओं में चर्चा तेज!

Satyakhabarindia

राष्ट्र्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Dr. Mohan Bhagwat ने असम और पूरे पूर्वोत्तर के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो समाज भारत से अलग हुआ, उसने अपनी विविधता खो दी—जैसे पाकिस्तान में पंजाबी और सिंधी समुदाय अब अपनी भाषाएँ खोकर उर्दू अपनाने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि केवल हिंदू समाज ही ऐसी सभ्यता है जो विविधता को सम्मान देती है और यही भावना भारत की ताकत है। गुवाहाटी के बाराबाड़ी स्थित सुदर्शनालय में आयोजित यूथ लीडरशिप कॉन्फ्रेंस में विभिन्न क्षेत्रों से आए सौ से अधिक युवा प्रतिनिधियों के सामने उन्होंने संघ के सिद्धांत, आदर्श और पद्धति पर विस्तार से चर्चा की और संगठन को लेकर चल रही बहसों पर भी अपनी बात रखी।

‘समाज जागरूक होगा तभी भ्रष्टाचार और गौ-संरक्षण संभव’

अपने संबोधन में भागवत ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार केवल कानूनी प्रावधानों से खत्म नहीं होगा, बल्कि इसके लिए समाज में चरित्र निर्माण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल कानून बनाकर गाय की रक्षा नहीं की जा सकती, इसके लिए सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता की जरूरत है। उनका कहना था कि यदि समाज स्वयं जागरूक हो जाए और नैतिकता को प्राथमिकता दे, तो कानून सिर्फ एक औपचारिकता रह जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिम्मेदार नागरिक और एक सजग समाज ही सभी समस्याओं के समाधान की कुंजी हैं।

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‘इंडिया फर्स्ट’ ही मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए

विदेश नीति और वैश्विक परिस्थितियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत को न किसी के प्रति झुकना चाहिए, न किसी से शत्रुता रखनी चाहिए। अमेरिका और चीन दोनों ही अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर काम करते हैं—भले ही वे वैश्विक भाईचारे की बातें करते हों, पर उनका व्यवहार उनके स्वार्थों से तय होता है। इसलिए, भारत का सिद्धांत बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए—इंडिया फर्स्ट। भागवत ने कहा कि जब हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हैं, तभी विश्व का कल्याण भी सुनिश्चित होता है। एक मज़बूत और आत्मनिर्भर भारत न केवल अपनी चुनौतियों का सामना कर सकता है, बल्कि भविष्य में विश्व के विभिन्न संघर्षों को सुलझाने और एक संतुलित, सामंजस्यपूर्ण वैश्विक व्यवस्था स्थापित करने में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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‘युवा स्वयं देखें, समझें और तब राय बनाएं’

डॉ. भागवत ने युवाओं से खास अपील की कि वे संघ को लेकर कोई राय पहले से बनी धारणाओं, सुनी-सुनाई बातों या प्रायोजित प्रचार के आधार पर न बनाएं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को संघ को करीब से देखना और उसके कार्यों को समझना चाहिए। समाज और राष्ट्र के लिए संगठन की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा हमेशा कहती है—“मेरा मार्ग सही है, पर तुम्हारा मार्ग भी तुम्हारी परिस्थितियों में सही हो सकता है।” उन्होंने दोबारा याद दिलाया कि जो समाज भारत से अलग हुए, उनकी विविधता खत्म हो गई, इसलिए विविधता का सम्मान करने वाला संगठित और सदाचारी समाज बनाना ही संघ का मूल उद्देश्य है। भागवत ने कहा, “जब तक भारतीय समाज संगठित और गुणवान नहीं बनता, तब तक देश की नियति नहीं बदल सकती।”

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