PM मोदी के संबोधन पर विपक्ष का हमला राजनीतिक विवाद ने पकड़ा तूल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष को महिला-विरोधी करार दिए जाने के बाद देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस संबोधन को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि यह एक निष्पक्ष और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला संदेश होना चाहिए था, लेकिन यह पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा हुआ नजर आया।
जयराम रमेश का आरोप: संबोधन निष्पक्ष नहीं
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के संबोधन को “दयनीय, पक्षपातपूर्ण और विवादास्पद” करार दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के नाम संबोधन का उद्देश्य जनता में विश्वास और एकता बढ़ाना होता है, लेकिन इस बार यह विपक्ष पर हमला करने का मंच बन गया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में हालिया घटनाओं और विधायी विफलताओं के बाद प्रधानमंत्री इतने विचलित हैं कि उन्होंने प्रेस के सामने आने के बजाय सीधे राष्ट्र के नाम संदेश देना चुना। उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दे पर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस तरह से परिसीमन और अन्य विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश की, वह संदिग्ध है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने में 30 महीने की देरी हुई और इसे देर रात अधिसूचित किया गया। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार की मंशा साफ थी तो इस प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हुई।
महुआ मोइत्रा और मल्लिकार्जुन खरगे ने भी साधा निशाना
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन को “ड्रामेबाजी” बताते हुए आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार का नैरेटिव और मीडिया का समर्थन वास्तविक मुद्दों को छुपा नहीं सकता। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के भाषण में कांग्रेस के जिक्र की संख्या गिनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 59 बार कांग्रेस का उल्लेख किया, लेकिन महिलाओं के मुद्दे पर बहुत कम बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे साफ है कि सरकार की प्राथमिकताओं में महिलाएं नहीं बल्कि राजनीतिक विरोधी ज्यादा केंद्र में हैं।