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राहुल गांधी का बजट 2026 पर बड़ा हमला: मोदी सरकार पर असली संकटों से अनजान होने का आरोप

Satyakhabarindia

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया तेजी से सामने आ रही है। खासकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस बजट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि देश की युवा पीढ़ी बेरोजगारी से जूझ रही है, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट आई है, और निवेशक अपने पूंजी को वापस ले रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि घरों की बचत तेजी से घट रही है और किसान आर्थिक संकट में हैं। उन्होंने बजट को एक ऐसा दस्तावेज बताया जो देश के वास्तविक संकटों को नकारता है और सुधार करने से इनकार करता है।

मल्लिकार्जुन खरगे का बजट पर आलोचनात्मक रुख

राहुल गांधी की आलोचना के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बजट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। खरगे ने कहा कि वर्तमान सरकार के पास अब कोई नया विचार या योजना नहीं बची है। उनके मुताबिक यह बजट न तो देश की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों का समाधान करता है और न ही सामाजिक या राजनीतिक समस्याओं का। उन्होंने कहा कि बजट में कोई स्पष्ट नीति विजन नहीं है और सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव नजर आ रहा है। किसान आज भी स्थायी आय सुरक्षा योजना और कल्याणकारी सहायता के लिए इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बजट में उनकी जरूरतों को अनदेखा किया गया है।

राहुल गांधी का बजट 2026 पर बड़ा हमला: मोदी सरकार पर असली संकटों से अनजान होने का आरोप

असमानता और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सहायता का अभाव

खरगे ने बजट में सामाजिक असमानता पर ध्यान न देने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत में सामाजिक और आर्थिक असमानताएं ब्रिटिश राज के समय से भी अधिक हो गई हैं, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं किया गया। विशेषकर SC, ST, OBC, EWS और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई ठोस सहायता या राहत नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त आयोग की सिफारिशों का अभी अध्ययन होना बाकी है, लेकिन यह आशंका है कि ये सिफारिशें उन राज्य सरकारों को राहत नहीं दे पाएंगी जो गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही हैं।

विपक्षी नेताओं का बजट को लेकर समग्र निष्कर्ष

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि वे इस बजट को देश की वर्तमान चुनौतियों से काफी अलग मानते हैं। उन्हें लगता है कि इस बजट में रोजगार, किसानों की हालत, निवेश, सामाजिक न्याय और आर्थिक सुधारों को नजरअंदाज किया गया है। विपक्ष का यह मानना है कि सरकार को अब तत्काल ठोस कदम उठाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक समरसता और विकास की दिशा में भी काम करना होगा। वे इस बजट को सुधारों और विकास की दिशा में एक कमजोर प्रयास मानते हैं जो देश के व्यापक हितों की अनदेखी करता है।

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