Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस की थीम का खुलासा, वंदे मातरम और आत्मनिर्भर भारत रहेगा केंद्र में

Republic Day 2026: भारत का 77वां गणतंत्र दिवस इस बार आज़ादी और समृद्धि के मंत्र के साथ मनाया जाएगा। कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड का मुख्य संदेश देश की ऐतिहासिक यात्रा और भविष्य की दिशा को दर्शाएगा। इस वर्ष परेड की थीम रखी गई है “मंत्र ऑफ फ्रीडम वंदे मातरम्” और “मंत्र ऑफ प्रॉस्पेरिटी आत्मनिर्भर भारत”। इन दोनों विषयों के जरिए भारत की आज़ादी की विरासत और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा। परेड के दौरान सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक भारत की झलक देखने को मिलेगी। कर्तव्य पथ पर कदमताल करते जवान और रंग बिरंगे कार्यक्रम देशवासियों में गर्व और उत्साह भर देंगे। यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं बल्कि भारत की एकता, संप्रभुता और विकास यात्रा का जीवंत प्रतीक होगा।
30 झांकियां और 2500 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति
इस साल गणतंत्र दिवस परेड में कुल 30 झांकियां शामिल होंगी जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। इनमें 17 झांकियां विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी जबकि 13 झांकियां अलग अलग मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी। करीब 2500 कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पूरे माहौल को जीवंत बना देंगे। नृत्य, संगीत और लोक कलाओं के माध्यम से भारत की विविध संस्कृतियों को एक मंच पर दिखाया जाएगा। हर झांकी अपने साथ एक कहानी और एक संदेश लेकर आएगी जो भारत की परंपरा, प्रगति और नवाचार को दर्शाएगी। यह परेड युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और दुनिया को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का एहसास कराएगी।

यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और वैश्विक संदेश
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह को और खास बनाने के लिए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनकी मौजूदगी भारत और यूरोप के रिश्तों को नई मजबूती देने का संकेत है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके प्रभाव को भी दर्शाता है। मुख्य अतिथियों की भागीदारी यह संदेश देती है कि भारत न केवल अपनी आंतरिक शक्ति पर ध्यान दे रहा है बल्कि वैश्विक सहयोग और साझेदारी को भी आगे बढ़ा रहा है। यह आयोजन भारत की कूटनीतिक सफलता और विश्व में उसकी साख को और मजबूत करेगा।
राज्यों की झांकियां और परंपरा व आत्मनिर्भरता का संगम
इस बार कई ऐसे राज्य भी परेड में शामिल होंगे जो पिछले वर्ष भाग नहीं ले पाए थे। इनमें असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, केरल और महाराष्ट्र शामिल हैं। इसके अलावा मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान और तमिलनाडु की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। असम की झांकी में अशारिकांडी गांव की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। गुजरात और छत्तीसगढ़ अपनी झांकियों में वंदे मातरम् की थीम को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत करेंगे। महाराष्ट्र की झांकी में गणेश चतुर्थी को आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में दिखाया जाएगा जबकि पश्चिम बंगाल की झांकी आज़ादी की लड़ाई में बंगाल के योगदान को उजागर करेगी। ये सभी झांकियां मिलकर भारत की सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भर भविष्य की प्रेरक तस्वीर पेश करेंगी।