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Haryana: एक व्यक्ति ने बना दिया ठगी का बैंक, करोड़ों की ठगी कर फरार, गिरफ्तार

Satyakhabarindia

Haryana: हरियाणा के गोहाना में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने पीएनएल नाम से फर्जी बैंक बनाकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस मामले में बैंक संचालक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके कई साथी अभी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पवन सैनी, निवासी गोहाना के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, पवन सैनी ने अपने पांच से छह साथियों के साथ मिलकर पीएनएल बैंक के नाम से एक फर्जी संस्था बनाई और लोगों को एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) में ऊंचा ब्याज देने का लालच देकर ठगा। आरोपी और उसके सहयोगियों ने इलाके में विश्वास कायम करने के लिए बाकायदा बैंक जैसा सेटअप तैयार किया था। इन ठगों ने नकली बोर्ड, काउंटर और कर्मचारियों की व्यवस्था भी की गई थी।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया है कि उन्होंने लोगों को उच्च ब्याज दरों का लालच देकर बैंक में खाते खुलवाए और उनसे लाखों रुपये जमा कराए। अब तक लगभग 15 से 20 पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिनसे करोड़ों रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है, क्योंकि कई लोग अब तक सामने नहीं आए हैं। गोहाना पुलिस ने बताया कि इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता की संभावना है। पुलिस टीम फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

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एसीपी राहुल देव ने बताया कि गोहाना में पीएनएल नामक फर्जी बैंक के संचालक को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी लोगों से पैसे लेकर अपनी निजी जरूरतें पूरी करता था। पुलिस का मानना है कि यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है, जिसके पीछे पूरा गिरोह सक्रिय था। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 15 से 20 शिकायतें दर्ज हुई हैं और करोड़ों रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा ताकि अन्य आरोपियों की जानकारी मिल सके।

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क्या है मामला

25 अक्तूबर को सिकंदपुर माजरा निवासी प्रवीन समेत कई लोगों ने थाना शहर गोहाना में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उन्होंने पीएनएल मोर धन बैंक में एफडी और सेविंग अकाउंट्स खुलवाए हुए थे। बैंक में लगभग 40 से 45 करोड़ रुपये की राशि जमा थी। जब उनकी एफडी और आरडी की अवधि पूर्ण हुई, तो बैंक के मालिक और कर्मचारी लापता हो गए तथा शिकायतकर्ताओं को बैंक से बाहर निकालते हुए कहा गया कि उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा। कुछ समय बाद बैंक कर्मियों ने बताया कि बैंक बंद हो गया है और उसका पोर्टल भी बंद कर दिया गया है। उन्होंने सभी से मूल दस्तावेज जमा करवाने को कहा, जिससे उन्हें कर्मचारियों पर शक हुआ कि ये सभी आपस में मिले हुए हैं और किसी भी तरह से रिफंड देने की मंशा नहीं रखते।

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