अग्निपथ योजना बन गई वरदान छूटी नौकरी तो कड़ी मेहनत से थल सेना में बना लेफ्टिनेंट पिता का साया बचपन में ही उठा, मां ने 800 रुपए महीने की नौकरी कर पाला
अग्निपथ योजना बन गई वरदान छूटी नौकरी तो कड़ी मेहनत से थल सेना में बना लेफ्टिनेंट पिता का साया बचपन में ही उठा, मां ने 800 रुपए महीने की नौकरी कर पाला

कहते हैं कि कई बार जिंदगी में आने वाली समस्याएं आदमी को इतना मजबूत बनाती हैं कि वह जीवन में बड़े मुकाम हासिल करता है।
जींद जिले के गांव अलीपुरा का हरदीप गिल थल सेना में लेफ्टिनेंट बन गया है। उसने 9वें प्रयास में SSB की कड़ी परीक्षा को पास किया है। मात्र 2 साल की उम्र में उसने अपने पिता को खो दिया था। माता ने मिड डे मिल में खाना बनाने की नौकरी कर अपने बेटे को पाला। अग्निवीर योजना आने से पहले एयरमैन के रूप में चयन हुआ लेकिन अग्निपथ योजना आने की वजह से नौकरी नहीं मिली। वायुसेना में नौकरी करने का सपना चकनाचूर हो गया। लेकिन हरदीप ने हिम्मत नहीं हारी और कड़ी मेहनत और लग्न से सपने को पूरा किया।
जींद के उचाना के गांव अलीपुरा के हरदीप के थल सेना में लेफ्टिनेंट लगने से घर ही नहीं पूरे गांव में खुशी का माहौल है। लेफ्टिनेंट बनने के पीछे हरदीप कि दर्द भरी कहानी रही है। हरदीप जब 2 वर्ष का था तो उसे समय एक हादसे में उसके पिता का शाया सिर से उठ गया था उसके बाद परिवार का जिम्मेदारियां का बोझ उसकी माता संतोष पर आ गया था। संतोष ने हार नहीं मानी और अपने बच्चों की पढ़ाई को जारी रखा। हरदीप का चयन आर्मी में एयरमैन के पद पर हुआ था,
लेकिन केंद्र सरकार ने आर्मी सेवाओं को अग्निवीर में बदल दिया। इसके बाद हरदीप की नौकरी हाथ से छूट गई। नौकरी छूटने से एक बार मायूसी हाथ लगी लेकिन हरदीप ने हार नहीं मानी और अपने मेहनत जारी रखी। कई वर्षों के बीत जाने के बाद हरदीप ने जीडीएस की परीक्षा पास की जिसमें हरदीप थल सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन हुआ। नौकरी मिलने की खुशी पूरे घर ही नहीं पूरे गांव को है। हरदीप ने अपनी पढ़ाई 12वीं तक गांव में ही की। उसके बाद BA को डिस्टेंस से पास करने का काम किया। आज हरदीप के चर्चे हो रहे हैं।
हरदीप ने बताया कि परीक्षा में उनका यह 9वां प्रयास था और नौवें प्रयास में सफलता हासिल की है। अखिल भारतीय मैरिट सूची में उनका 54वां स्थान हासिल करके 2024 में IMA में शामिल हुए। पहले वह भारतीय वायु सेवा में एयरमैन के पद पर नौकरी मिली थी लेकिन केंद्र सरकार के द्वारा सभी सेवा भर्ती को अग्निपथ में बदल दिए जाने के बाद उनको निराशा हाथ लगी। उनको अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इसी वर्ष देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी से उत्तीर्ण होने के बाद उन्हें सिख लाइट इनफैंट्री में कमीशन दिया गया है।
जब वह मात्र 2 साल से भी कम उम्र का था, उस समय एक हादसे में उसके पिता को उसने खो दिया था। उसकी माता ने जो एक सरकारी स्कूल में मिड डे मील में बच्चों को खाना बनाने का काम करती थी उनको महीने के ₹800 दिए जाते थे और साथ में एक छोटी सी जमीन की भी देखभाल करती थी, ने ही उसे पाला। आज वह जो भी कुछ है उनके परिवार की बदौलत से है और अपनी कामयाबी का श्रेय अपने परिवार को देना चाहता है।