हरियाणा में एसआईआर की तैयारियों में लगी भाजपा और कांग्रेस
भाजपा ने बुलाई सोमवार को बैठक, कांग्रेस मंगल और बुध को करेगी मंथन, एक-एक वोट के लिए जद्दोजहद

सत्य खबर हरियाणा
Fight for Every Voter : हरियाणा की राजनीति में अब कांग्रेस और भाजपा के बीच ‘हर वोट’ और ‘हर वोटर’ तक पहुंच बनाने की लड़ाई शुरू होने जा रही है। निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की इस कवायद को राजनीतिक दल भविष्य के चुनावी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। यही वजह है कि सत्ता पक्ष भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने इसे लेकर हाईअलर्ट मोड में तैयारियां शुरू कर दी हैं। बूथ स्तर तक संगठन को एक्टिव किया जा रहा है और नेताओं की लगातार बैठकें तय हो रही हैं।

सत्तारूढ़ भाजपा ने 25 मई को पंचकूला स्थित प्रदेश मुख्यालय ‘पंचकमल’ में एसआईआर को लेकर बड़ी बैठक बुलाई है। इस बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा मामलों के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया और प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली सहित सभी सांसद, मंत्री, विधायक, जिला प्रभारी, जिलाध्यक्ष, पूर्व सांसद, मेयर, जिला परिषद चेयरमैन और एसआईआर से जुड़ी प्रदेश स्तरीय टीमें मौजूद रहेंगी। भाजपा की कोशिश है कि बूथ स्तर तक अपने नेटवर्क को और मजबूत किया जाए, ताकि नए मतदाताओं को जोड़ने और समर्थक वोटरों के नाम सुरक्षित रखने में कोई कमी न रहे। पार्टी इसे ‘चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट’ का सबसे अहम चरण मान रही है।
भाजपा की सक्रियता के बीच कांग्रेस भी पीछे नहीं रहना चाहती। प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में 26 और 27 मई को एसआईआर को लेकर दो अहम बैठकें बुलाई गई हैं। पहले दिन एसआईआर समिति की बैठक होगी, जबकि दूसरे दिन बीएलए-। (बूथ लेवल एजेंट्स) के साथ विस्तृत रणनीति बनाई जाएगी। बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। बैठक में समिति के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया है। कांग्रेस की चिंता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी समर्थक मतदाता का नाम सूची से कटे नहीं और बूथ स्तर पर संगठन की निगरानी मजबूत बनी रहे।
इस विशेष अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और शुद्ध बनाना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं। मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। डुप्लीकेट वोट समाप्त किए जाते हैं। पते और अन्य विवरणों का सत्यापन होता है। बीएलओ घर-घर जाकर जांच करते हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि कई सीटों पर जीत-हार कुछ सौ वोटों से तय होती है।
हरियाणा में 5 जून से 14 जून तक एसआईआर को लेकर तैयारी, प्रशिक्षण और प्रिंटिंग का काम होगा। 15 जून से 14 जुलाई तक बीएलओ घर-घर विजिट करेंगे। 14 जुलाई को पोलिंग स्टेशनों का रेशनलाइजेशन होगा और 21 जुलाई को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन होगा। इसके बाद 21 जुलाई से 20 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि तय की गई है। 18 सितंबर को क्लेम और ऑब्जेक्शन का निपटारा होगा और 22 सिंतबर को फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन होगा। प्रदेश में योग्यता तिथि पहली जुलाई, 2026 मानी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एसआईआर का सबसे बड़ा फायदा उस दल को मिल सकता है, जिसकी बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत होगी। भाजपा फिलहाल सत्ता में होने के कारण संगठनात्मक रूप से ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रही है। वहीं कांग्रेस इसे अपने पारंपरिक वोट बैंक को सुरक्षित रखने का बड़ा मौका मान रही है। देश में अब तक हुए एसआईआर का लाभ भाजपा को ही हुआ है। यहां तक की पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में भी भाजपा एसआईआर के कारण सत्ता में आने में सफल रही। खासकर ग्रामीण इलाकों, नए युवा वोटरों और शहरी माइग्रेशन वाले क्षेत्रों में इस बार वोटर लिस्ट का गणित कई सीटों की तस्वीर बदल सकता है। यदि किसी दल के समर्थक वोटर सूची से बाहर रह जाते हैं या नए वोटर समय पर नहीं जुड़ते, तो इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दोनों दल इसे सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी अस्तित्व की लड़ाई की तरह देख रहे हैं।
हरियाणा में आने वाले महीनों में एसआईआर सिर्फ मतदाता सूची सुधार का अभियान नहीं रहेगा, बल्कि यह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा मंच बनने जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने जिस तरह शीर्ष स्तर पर मोर्चा संभाला है, उससे साफ है कि आने वाले चुनावों की बुनियाद अब बूथ स्तर पर रखी जाएगी। प्रदेश की राजनीति अब नारों से आगे बढ़कर ‘डेटा, वोटर और बूथ मैनेजमेंट’ के दौर में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में यह लड़ाई सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि हर वोटर तक पहुंच बनाने की भी होगी।
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