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अल-फलाह पर ED का बड़ा हमला, 139 करोड़ की संपत्ति अटैच

चार्जशीट में 6 गंभीर आरोप निर्धारित, पूरी तरह फर्जीवाड़े के सहारे चल रही थी यूनिवर्सिटी

Satyakhabarindia

Satyakhabar, Haryana

Delhi Car Blast : अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यूनिवर्सिटी कैंपस की 54 एकड़ जमीन समेत 139 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली है। ED ने सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा यूनिवर्सिटी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट में की गई वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में चार्जशीट भी दाखिल की है।

बताया जा रहा है कि सिद्दीकी का संबंध अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े नौ संस्थानों से है, जो यूनिवर्सिटी के कामकाज की देखरेख करता है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी हॉस्टल में कैटरिंग और कैंपस में इमारतों के निर्माण के ठेके सिद्दीकी की कंट्रोल वाली कंपनियों को दिए गए थे। यह भी आरोप है कि चैरिटेबल ट्रस्ट ने जमीन खरीदने के लिए यूनिवर्सिटी के फंड का गलत इस्तेमाल किया।

यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला फरीदाबाद के व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच से जुड़ा है। इस आतंकी मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने वाले या पढ़ने वाले डॉक्टर शामिल थे। यूनिवर्सिटी में काम करने वाले डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन शाहिद को 10 नवंबर को दिल्ली लाल किला ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले गिरफ्तार किया गया था। लाल किला ब्लास्ट करने वाले डॉ. उमर उन नबी ने भी इसी संस्थान से पढ़ाई की थी।

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18 नवंबर को, ED ने फरीदाबाद में यूनिवर्सिटी और दिल्ली में अल फलाह ग्रुप से जुड़े लोगों के घरों समेत 18 जगहों पर छापेमारी की, जिसके बाद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया गया। यह जांच तब शुरू हुई जब ED ने पाया कि यूनिवर्सिटी ने फर्जी UGC मान्यता और NAAC ग्रेडिंग के नाम पर छात्रों और जनता को गुमराह करके 415 करोड़ रुपए की ठगी की थी। यह भी कहा जा रहा है कि इसमें विदेशों से भी फंड आया हो सकता है।

सिद्दीकी को 2001 में भी फर्जी निवेश कंपनियां बनाकर लोगों को पैसा लगाने के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। करीब 7.5 करोड़ रुपए आरोपियों के निजी खातों में ट्रांसफर किए गए थे। 2004 में, पीड़ितों को पैसा वापस करने पर सहमत होने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।

ED की जांच में खुलासे

1. ED की जांच में सबसे गंभीर खुलासा यह हुआ कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने तीन ऐसे डॉक्टरों को नियुक्त किया जिनका संबंध बाद में लाल किला धमाके से सामने आया। डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद को NIA ने गिरफ्तार किया, जबकि डॉ. उमर नबी धमाके में इस्तेमाल वाहन को चला रहा था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्वीकार किया कि किसी भी स्तर पर पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया। यह चूक नहीं बल्कि लापरवाही की पराकाष्ठा मानी जा रही है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील संस्थान में सुरक्षा जांच अनिवार्य होती है।

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2. ED की चार्जशीट में बताया गया है कि यूनिवर्सिटी ने कई डॉक्टरों को सिर्फ दस्तावेजों में नियुक्त दिखाया। इन्हें 22 दिन पंच या हफ्ते में दो दिन जैसी शर्तों पर दर्शाया गया। हकीकत यह थी कि ये डॉक्टर न पढ़ाते थे, न अस्पताल आते थे और न मरीजों का इलाज करते थे। यह पूरी व्यवस्था सिर्फ नेशनल मेडिकल कमीशन को भ्रमित करने और मेडिकल कॉलेज की मान्यता बनाए रखने के लिए खड़ी की गई थी। ED के मुताबिक यह एक संगठित फर्जीवाड़ा था, न कि कोई प्रशासनिक गलती।

3. जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी का अस्पताल लंबे समय तक लगभग वर्किंग नहीं था. ED ने चैट मैसेज और वीडियो कॉल्स के आधार पर दावा किया कि निरीक्षण से ठीक पहले फर्जी मरीज भर्ती कराए जाते थे। रिकॉर्ड बताते हैं कि NMC निरीक्षण से करीब तीन हफ्ते पहले तक अस्पताल में न डॉक्टर मौजूद थे, न स्टाफ और न ही मरीज। जैसे ही निरीक्षण की सूचना मिलती थी, अचानक अस्पताल सक्रिय दिखने लगता था। यह स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ खुला मजाक माना जा रहा है।

4. ED के सामने यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर और प्रिंसिपल ने बयान दिया कि तीनों संदिग्ध डॉक्टरों की नियुक्ति उनके कार्यकाल में हुई थी। ये नियुक्तियां HR विभाग की सिफारिश पर और यूनिवर्सिटी चेयरमैन जव्वाद अहमद सिद्दीकी की मंजूरी से की गईं। इसके बाद औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी किए गए। हैरानी की बात यह है कि किसी भी स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों या पुलिस से वेरिफिकेशन नहीं कराया गया। इससे सवाल उठता है कि क्या यह लापरवाही थी या जानबूझकर आंखें मूंदी गईं।

5. ED ने इस केस में ₹493.24 करोड़ की राशि को कथित मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा बताया है। एजेंसी का आरोप है कि छात्रों को फर्जी NAAC ग्रेड और UGC मान्यता का झांसा देकर भारी फीस वसूली गई। इस पूरी राशि को शिक्षा के नाम पर वैध दिखाया गया। ED का कहना है कि चेयरमैन ने यूनिवर्सिटी के वित्तीय फैसलों पर पूरा नियंत्रण रखा और फर्जीवाड़े को व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया।

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6. ED ने अपनी जांच में यह भी संकेत दिए हैं कि यूनिवर्सिटी चेयरमैन के बेटे और बेटी के विदेशी कनेक्शन हो सकते हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों में उन्हें ब्रिटिश नागरिक बताया गया है। हालांकि इस दावे की अभी पुष्टि की जा रही है। एजेंसी का मानना है कि मनी लॉन्ड्रिंग के तार विदेश तक जुड़े हो सकते हैं। वहीं चेयरमैन ने किसी भी आतंकी या प्रतिबंधित संगठन से संबंध होने से इनकार किया है।

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