आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार तीन दिन से लापता, सीबीआई कर रही तलाश, हाई कोर्ट से मांगी अग्रिम जमानत
30 जून को होना है रिटायर, हाईकोर्ट अग्रिम जमानत पर करेगी 2 जुलाई को सुनवाई

सत्य खबर हरियाणा
IDFC First Bank Scam : हरियाणा के बहुचर्चित बैंक घोटाले के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के निशाने पर अब निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार हैं। एजेंसी उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। वहीं आई.ए.एस. अधिकारी प्रदीप कुमार ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई तय की है। प्रदीप कुमार की सेवानिवृत्ति में आज समेत केवल चार दिन बचे हैं। उनको 30 जून को रिटायर होना है।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि गिरफ्तारी की आशंका के बीच वह फिलहाल जांच एजेंसी की पहुंच से बाहर हैं। उनका फोन भी बंद आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि वीरवार को चंडीगढ़ में उनकी गिरफ्तारी के लिए 3 जगहों में सी.बी.आई. ने दबिश दी लेकिन उनका कहीं पता नहीं चल सका। बताया जा रहा है कि सी.बी.आई. की पूछताछ में उनके परिजनों ने भी अनभिज्ञता जताई है। बताया जा रहा है कि प्रदीप कुमार 3 दिन से लापता हैं लेकिन परिवार की ओर से इस मामले में अभी तक कोई भी जानकारी पुलिस को नहीं दी गई है।
सीबीआई इससे पहले आईएएस आरके सिंह व पंकज अग्रवाल को भी गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों अधिकारियों की रिमांड अवधि पूरा होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उन दोनों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की जांच का फोकस प्रदीप कुमार पर था।
सीबीआई के अनुसार, 31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 के बीच प्रदीप कुमार के हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव रहने के दौरान सरकारी धन के कथित गबन का मामला सामने आया। सीबीआई का आरोप है कि इस अवधि में बोर्ड के खाते से करीब 169.36 करोड़ रुपये निजी कंपनियों में निवेश किए गए और बाद में कथित तौर पर शेल कंपनियों के माध्यम से राशि निकाल ली गई।
सीबीआई ने इस मामले में 23 जून को बोर्ड के डाटा एंट्री ऑपरेटर सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। वह चार दिन की सीबीआई रिमांड पर है।
यह घोटाला फरवरी में सामने आया था जब हरियाणा के पंचायत विभाग ने अपना बैंक खाता बंद कर उसमें मौजूद राशि को किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज राशि और खाते में वास्तव में मौजूद रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया। सीबीआई के मुताबिक बैंक के अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर हरियाणा के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के खातों से 657 करोड़ रुपये की हेराफेरी की।
आईएएस विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में
बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन आईएएस विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं। राज्य सरकार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत जांच की मंजूरी पहले ही दे चुकी है।
एचसीएस से हुए थे पदोन्नत, 27 साल की है सेवा
प्रदीप कुमार हरियाणा कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें हरियाणा सिविल सेवा से पदोन्नत कर आईएएस बनाया गया था। उन्होंने 1999 में करनाल में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की थी। करीब 27 साल की सेवा में वह सिरसा और फतेहाबाद के उपायुक्त, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, पर्यावरण निदेशक और कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
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