Punjab कांग्रेस में जातिगत राजनीति का साया, 2027 चुनाव से पहले उठे बड़े सवाल

Punjab कांग्रेस के भीतर दलित और जाट सिख समुदाय के बीच राजनीतिक संघर्ष की आग भड़क गई है। शनिवार, 17 जनवरी को पंजाब कांग्रेस के एससी विंग की एक बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने दलितों के उचित प्रतिनिधित्व की कमी की शिकायत की। उन्होंने कहा कि पार्टी के राज्य अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, छात्र और महिला विंग के प्रमुख सभी जाट सिख समुदाय से हैं। चन्नी ने यह भी जोर देकर कहा कि दलितों को पार्टी में वह सम्मान और प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा, जो मिलना चाहिए। बैठक के दौरान दलित नेताओं ने चन्नी के पक्ष में नारे भी लगाए। हालांकि इस घटना का वीडियो अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन एक कांग्रेस नेता ने इसे दिखाया है जिसमें चन्नी अपने बयानों को स्पष्ट करते हुए नजर आ रहे हैं।
अमरिंदर सिंह राजा वारिंग का जवाब
इस मामले पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा कि पार्टी के अंदर क्या हुआ यह एक आंतरिक मामला है और इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने चन्नी के बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने ही चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था। वारिंग ने कहा कि चन्नी ने दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव हारे, लेकिन पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में जालंधर से उम्मीदवार बनाया, जिसे उन्होंने जीता। जब वह विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, तब उन्हें पार्टी ने सनिल जाखड़ को हटाकर सीएलपी (कांग्रेस विधायक दल) का नेता बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि चन्नी कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी सदस्य हैं, इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि कांग्रेस में दलितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। उन्होंने पार्टी की सेक्युलर पहचान को भी दोहराया और कहा कि कांग्रेस जाति या धर्म के आधार पर निर्णय नहीं लेती।

विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां और पार्टी की रणनीति
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, और इस बीच कांग्रेस के अंदर चल रही आंतरिक कलह ने माहौल को और गर्मा दिया है। पार्टी की रणनीति और गठबंधन को लेकर विभिन्न मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी 2022 जैसी गलतियां दोबारा नहीं दोहराएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी बिना मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा किए चुनाव लड़ने का फैसला करेगी, ताकि अंदरूनी कलह कम हो और चुनाव पर फोकस बढ़े। इस बयान से संकेत मिलता है कि कांग्रेस अगली चुनावी लड़ाई को लेकर अधिक संयम और सतर्कता से काम करेगी।
दलित प्रतिनिधित्व विवाद के राजनीतिक मायने
चन्नी की शिकायत और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है कि पंजाब कांग्रेस में जातीय समीकरणों को लेकर गहरी खींचतान चल रही है। दलित और जाट सिख समुदाय दोनों ही पंजाब की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। दलितों के बीच यह भावना कि उन्हें पार्टी में उचित स्थान नहीं मिल रहा, कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। वहीं, पार्टी नेतृत्व का यह दावा कि सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता है, उसकी साख पर सवाल उठाता है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस विवाद का हल कांग्रेस की चुनावी रणनीति और पार्टी की छवि पर गहरा असर डाल सकता है। ऐसे में कांग्रेस को जातीय संतुलन बनाए रखते हुए अपनी एकजुटता दिखानी होगी, नहीं तो यह विवाद विपक्ष के लिए मौका साबित हो सकता है।