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कुत्तों के लिए देश का पहला श्मशान घाट फरीदाबाद में बनकर तैयार नगर निगम ने दी जमीन सामाजिक संस्था ने बनाकर किया तैयार अब मुफ्त में होगा कुत्तों का अंतिम संस्कार

कुत्तों के लिए देश का पहला श्मशान घाट फरीदाबाद में बनकर तैयार नगर निगम ने दी जमीन सामाजिक संस्था ने बनाकर किया तैयार अब मुफ्त में होगा कुत्तों का अंतिम संस्कार

Satyakhabarindia

Green crematorium : हरियाणा के पूर्व विशेष मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत आईएएस अधिकारी सुनील गुलाटी के नेतृत्व में फरीदाबाद में अब कुत्तों का भी अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसके लिए सामाजिक संस्था ‘आपसी’ ने फरीदाबाद के बुढ़ेना गांव में एक श्मशान घाट बनाया है जो आने वाले तीन-चार दिनों में काम शुरू कर देगा। इस श्मशान घाट के लिए नगर निगम ने जमीन देने का काम किया है।

आपसी संस्था के विनीत खट्टर बताते हैं कि यह देश का पहला ऐसा श्मशान घाट है जहां सिर्फ कुत्तों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस शमशान घाट में 80 किलोग्राम तक वजन वाले पालतू पशुओं का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इसे ‘हरित श्मशान घाट’ की संज्ञा दी गई है। उन्होंने बताया पालतू पशुओं का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक 80 किलो के पालतू पशु का अंतिम संस्कार करें अगर लड़कियों से किया जाए तो उसमें करीब 170 किलो लकड़ी लगेगी लेकिन अगर गोबर के उपयोग से यह काम किया जाए तो केवल 30 से 40 किलो उपलों में काम हो जाएगा जिससे प्रदूषण 80 से 90% तक काम हो जाएगा। पर्यावरण को सीधा फायदा मिलने के कारण इसे हरित श्मशान घाट की संज्ञा दी गई है।

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इस श्मशान घाट के लिए नगर निगम ने करीब 500 वर्ग गज जमीन संस्था को दी थी जिसके बाद संस्था ने करीब साढ़े 4 लाख रुपए की लागत से इस श्मशान घाट का निर्माण किया है। श्मशान घाट की टेस्टिंग का काम पूरा हो चुका है और यह अगले सप्ताह से काम करना शुरू कर देगा। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था शहर में जहां भी कोई छोटा जानवर मरा हुआ मिलेगा उसे पिकअप सर्विस के जरिए श्मशान घाट लेगी और इसके लिए किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। शमशान घाट में दो लोगों की ड्यूटी लगाई गई है जो हमेशा यहां रहेंगे और वह शमशान घाट की देखभाल और इसके संचालन का काम करेंगे। जिस जानवर को यहां लाया जाएगा उसका यहां पर बिना किसी शुल्क के अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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उन्होंने बताया कि रेबीज वाले कुत्तों को अगर मिट्टी में दबा दिया जाता है तो उससे दूसरे कुत्तों में रेबीज फैलने की संभावना बनी रहती है, लेकिन उनके अंतिम संस्कार के बाद यह संभावना भी खत्म हो जाएगी जिससे रेबीज की बीमारी पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि कुत्ते के मरने पर लोग उसे ऐसे ही फेक भी देते हैं जिससे शहर भी गंदा होता है। इस समस्या को देखते हुए उनकी संस्था ने नगर निगम से संपर्क स्थापित किया और कई बैठकों के बाद यह प्रोजेक्ट शुरू हो पाया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम आयुक्त का धन्यवाद भी किया और कहा कि यह प्रोजेक्ट शहर में इंसानियत की मिसाल बनने का काम करेगा।
उन्होंने बताया कि इस श्मशान घाट में खास किस्म की फायर ब्रिक्स लगाई गई है ताकि ज्यादा तापमान पर इंटर फटे नहीं अंदर मजबूत रहेगा स्ट्रक्चर भी लगाया गया है ताकि जहां संस्कार में कोई दिक्कत ना आए।

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