Congress Politics: कांग्रेस हाईकमान नहीं कर पा रही गुटबाजी खत्म, लटक रही प्रदेश कार्यकारिणी पर तलवार

Congress Politics: कांग्रेस ने हरियाणा में जिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष तथा हरियाणा विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता की नियुक्ति तो कर दी है लेकिन अभी तक प्रदेश कार्यकारिणी और जिला कार्यकारिणियों का गठन नहीं हो पाया है। कांग्रेस हाईकमान प्रदेश में जिला और प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की कोशिश कर रही है लेकिन यह काम उसके लिए भी इतना आसान साबित नहीं हो पा रहा है जितना अब तक समझा जा रहा था।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान पहले प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करना चाहता है और इसके लिए उसने प्रदेश के सभी प्रमुख नेताओं से उनकी पसंद के नाम मांगे हैं लेकिन प्रदेश के नेताओं द्वारा हाईकमान को अभी तक नाम नहीं दिए गए हैं। जिस कारण प्रदेश कार्यकारिणी का गठन की प्रक्रिया की रफ्तार बहुत धीमी है।
कांग्रेस हाईकमान जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करते समय निष्पक्षता और पारदर्शिता का दावा किया था लेकिन जिस प्रकार से अब प्रदेश के नेताओं से उनकी पसंद के नाम मांगे जा रहे हैं उसे साफ है कि कांग्रेस अपने पुराने ढर्रे से बाहर नहीं निकल पा रही है।
हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने अपनी नियुक्ति के बाद सभी का भरोसा जीतने और सभी को साथ लेकर चलने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस संगठन में वह पूरी तरह से अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं।

इसका कारण यह है कि राव नरेंद्र अभी तक राज्य में अपनी मजबूत टीम खड़ी नहीं कर पाए हैं। कई जिलाध्यक्ष ऐसे हैं, जो उनके कहने में नहीं हैं, जबकि कुछ जिलाध्यक्ष ऐसे हैं, जो विधायकों पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं।
इसी तरह कई विधायकों ने जिलाध्यक्षों का सहयोग नहीं मिलने का आरोप कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में लगाया है, जिसका असर मजबूत संगठन नहीं बन पाने के रूप में सामने आ रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने जल्दी ही प्रदेश पदाधिकारियों की सूची जारी होने के संकेत दिये हैं। उन्होंने समय अवधि तो नहीं बताई, लेकिन माना जा रहा है कि नये साल के पहले माह में हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारियों की सूची जारी हो सकती है।
कांग्रेस हाईकमान के पास यदि राज्य के प्रमुख नेताओं ने अपनी पसंद के नाम नहीं भेजे तो संभावना है कि प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र की पसंद के ही सारे पदाधिकारियों को कमेटी में शामिल कर लिया जाए। पिछले सालों में नामों पर सहमति नहीं बन पाने की वजह से ही न तो समय से जिलाध्यक्ष बन पाए थे और न ही संगठन तैयार हो पाया था। कुछ इसी तरह की स्थिति वर्तमान में कांग्रेस की बनी हुई है।