India Gate Protest: इंडिया गेट पर हिंसक प्रदर्शऩ, नक्सली कमांडर हिडमा के समर्थन में लगे नारे मिर्च स्प्रे से पुलिस में हड़कंप

India Gate Protest: दिल्ली के इंडिया गेट पर हुए प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। शांतिपूर्वक बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश हुई तो भीड़ ने पुलिस पर मिर्ची स्प्रे का इस्तेमाल कर दिया। कई पुलिसकर्मियों की आंखों में जलन हुई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी प्रदर्शन में उन पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल हुआ है। यह घटना इतनी तेजी से घटी कि मौके पर मौजूद मेडिकल टीमें भी फंस गईं और स्थिति संभालने में काफी समय लगा।
एफआईआर और गिरफ्तारियां
इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया है। दो अलग-अलग थानों में गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई है। कर्तव्य पथ थाने में छह पुरुष आरोपियों पर महिलाओं को चोट पहुंचाने बच्चों को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कर्मचारियों से मारपीट करने जैसी धाराएं लगाई गई हैं। वहीं संसद मार्ग थाने में दर्ज एफआईआर में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने साजिश रचने और गलत तरीके से रास्ता रोकने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोप गंभीर हैं और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

नक्सल कनेक्शन की जांच
पुलिस के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारी माओवादी कमांडर मदवी हिड़मा के पोस्टर लेकर आए थे और लाल सलाम के नारे लगा रहे थे। हिड़मा हाल ही में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। इसी वजह से पुलिस ने एफआईआर में राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालने वाली धारा 197 भी जोड़ दी है। कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस ने वीडियो फुटेज भी दिखाई और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के नक्सली संगठन से संबंध हो सकते हैं। अब इस पहलू की गहन जांच की जा रही है।
कोर्ट की सख्त निगरानी
सोमवार को छह आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने वीडियो की कॉपी मांगी और पांच आरोपियों को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एक आरोपी जिसने खुद को नाबालिग बताया उसे सुरक्षित गृह भेजा गया है। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि आरोपियों को हिरासत में यातना दी गई और वे पूरी तरह शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। कोर्ट ने आरोपियों की चोटें देखकर पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
आगे की कार्रवाई पर नज़र
यह मामला अब सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है बल्कि कानून व्यवस्था और कथित नक्सल संबंधों की गंभीर जांच का विषय बन गया है। पुलिस का कहना है कि उन्हें आरोपियों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटानी हैं जबकि आरोपियों के वकील इसे पुलिस की मनमानी बता रहे हैं। आने वाले दिनों में कोर्ट के आदेश और पुलिस की जांच के आधार पर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि राजधानी में होने वाले प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बनाए रखना कितना कठिन होता जा रहा है।