Magh Mela 2026: शंकराचार्य बोले- हमें रोक सकते हैं तो रोक लें, योगी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

Satyakhabarindia

Magh Mela 2026: प्रयागराज में माघ मेले के सबसे बड़े पर्व मौनी अमावस्या पर संगम तट पर भारी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कई कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। इसी बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन ने आगे बढ़ने से रोक दिया। स्वामी जी के रथ से उतरकर पैदल चलने के आग्रह को उनके समर्थकों ने मानने से इंकार कर दिया और वे आगे बढ़ने लगे। इससे पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की और हल्की झड़प हो गई। फिलहाल शंकराचार्य का जुलूस रुका हुआ है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।

पुलिस और समर्थकों के बीच तनातनी और जुलूस रुका

जब प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शंकराचार्य को रथ से उतरकर पैदल चलने का सुझाव दिया, तो उनके समर्थकों ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कड़े कदम उठाए जिससे झड़प की स्थिति पैदा हो गई। इस बीच पुलिस और समर्थकों के बीच कई बार धक्कामुक्की हुई, जिससे तनाव बढ़ गया। ऐसे में जुलूस को रोककर सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है। प्रशासन ने स्थिति को शांतिपूर्ण बनाने की पूरी कोशिश की लेकिन भीड़ के कारण हालात नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।

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शंकराचार्य का प्रशासन पर आरोप

इस पूरे घटनाक्रम पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े अधिकारी और पुलिस वाले संतों को मारने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने सहयोग का आग्रह किया था लेकिन बाद में जब वे पीछे हटे तो पुलिस ने उनके समर्थकों पर बल प्रयोग किया। स्वामी जी ने कहा कि वे स्नान करने के लिए संगम गए थे लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोका। उन्होंने कहा, “हमें रोक सकते हैं तो रोक लें, लेकिन हम स्नान करेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर हो रहा है और यह उनके खिलाफ बदले की भावना या उन्हें खुश करने की कोशिश हो सकती है।

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कुम्भ मेले के बाद बढ़ा विवाद, संतों का अपमान आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि पहले कुम्भ मेले के दौरान भी उनके खिलाफ आरोप लगाए गए थे और जिम्मेदारों को उन्होंने पहचान लिया था। उन्होंने कहा कि अब ये अधिकारी या तो बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं या मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए उनका अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि संतों के साथ यह रवैया बिल्कुल गलत है और वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस बयान के बाद प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तनाव बढ़ गया है। मामले को लेकर प्रशासन ने अभी तक कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है लेकिन स्थिति को जल्द सामान्य करने के लिए अधिकारियों ने स्थिति पर कड़ी नजर रखी है।

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