CNG की असली सच्चाई, इन शहरों में 15 रु तक महंगी – जानिए वजह

अगर आप सोचते हैं कि सीएनजी (CNG) पूरे भारत में एक समान सस्ती होती है, तो आप गलत हैं. देश के कई शहरों में सीएनजी की कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक का अंतर देखने को मिल रहा है. यह फर्क सीधा आपकी जेब पर असर डालता है.
इस असमानता की सबसे बड़ी वजह है — सीएनजी का जीएसटी (GST) के दायरे से बाहर होना. चूंकि यह अभी भी राज्यों के टैक्स ढांचे के तहत आती है, इसलिए हर राज्य सरकार इस पर अपना अलग वैट (VAT) लगाती है. दिल्ली जैसे कुछ राज्यों में वैट कम होने से कीमतें कम हैं, जबकि यूपी, महाराष्ट्र या राजस्थान जैसे राज्यों में ज्यादा वैट होने के कारण सीएनजी महंगी है.
दूसरी वजह है हर शहर की अलग गैस वितरण कंपनी. उदाहरण के लिए, दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL), मुंबई में महानगर गैस लिमिटेड (MGL), और गुजरात में अदानी टोटल गैस जैसी कंपनियां सीएनजी सप्लाई करती हैं. इन कंपनियों की खरीद लागत, ट्रांसपोर्ट चार्ज, और मुनाफे का प्रतिशत अलग होता है, जिससे कीमतों में फर्क आता है.
इसके अलावा, परिवहन लागत भी अहम भूमिका निभाती है. जो शहर एलएनजी टर्मिनल या गैस स्रोतों से दूर हैं, वहां तक गैस पहुंचाने का खर्च अधिक होता है, और यही लागत ग्राहकों तक पहुंच जाती है.
अगर हम मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें, तो दिल्ली में सीएनजी ₹74.59 प्रति किलो, जबकि लखनऊ में ₹93 प्रति किलो बिक रही है. मुंबई में यह ₹76.98, पुणे में ₹92.05, और जयपुर में ₹91.91 प्रति किलो है. वहीं, पठानकोट में सबसे सस्ती ₹71.53 प्रति किलो सीएनजी उपलब्ध है.
स्पष्ट है कि जब तक प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया जाता, तब तक यह “सस्ता ईंधन” हर जगह सस्ता नहीं रहेगा. इसलिए, नई सीएनजी कार खरीदने से पहले या पुरानी में किट लगवाने से पहले अपने शहर की कीमत जरूर जांच लें — वरना “बचत” का सपना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.